BSE शेयर ने बनाया रिकॉर्ड! Q3 नतीजों से आई ₹3175 पार, पर वैल्यूएशन पर उठ रहे सवाल

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AuthorAditya Rao|Published at:
BSE शेयर ने बनाया रिकॉर्ड! Q3 नतीजों से आई ₹3175 पार, पर वैल्यूएशन पर उठ रहे सवाल
Overview

BSE Ltd. के निवेशकों की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा! कंपनी के दमदार Q3FY26 नतीजों के ऐलान के बाद शेयर की कीमत **₹3,175** के नए लाइफ हाई पर पहुंच गई। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले **174%** बढ़कर **₹603 करोड़** हो गया, जबकि रेवेन्यू **62%** की छलांग लगाकर **₹1,244 करोड़** पर पहुंच गया। इस शानदार तेजी की मुख्य वजह ट्रांजैक्शन चार्जेस में हुई भारी बढ़ोतरी है।

Q3 में BSE की कमाई का तूफान, शेयर ने छुई नई ऊंचाई

BSE Ltd. के शेयर रॉकेट की तरह भागे हैं! कंपनी के शानदार तिमाही नतीजों के बाद शेयर की कीमत ₹3,175 के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही (Q3FY26) में, BSE ने ₹603 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹225 करोड़ के मुकाबले 174% ज्यादा है। वहीं, ऑपरेशन से होने वाली कमाई में भी 62% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹1,244 करोड़ पर पहुंच गई। इस नतीजे के दम पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन फरवरी 2026 तक करीब ₹1.17 से ₹1.21 ट्रिलियन तक पहुंच गया है।

ट्रांजैक्शन चार्जेस बने कमाई का इंजन

इस बंपर मुनाफे की सबसे बड़ी वजह ट्रांजैक्शन चार्जेस से हुई आमदनी है, जो पिछले साल के मुकाबले 86% बढ़कर ₹952 करोड़ पर पहुंच गई। इसके अलावा, डेटा सर्विसेज और BSE Star MF म्यूच्यूअल फंड प्लेटफॉर्म से होने वाली कमाई भी लगातार बढ़ रही है। सेटलमेंट गारंटी फंड से मिली इनकम सहित ऑपरेटिंग EBITDA में 3 गुना का इजाफा हुआ और यह ₹732 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि, रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन्स में 90% और टेक्नोलॉजी खर्चों में 35% की बढ़ोतरी हुई, लेकिन इसके बावजूद मुनाफा शानदार रहा।

वैल्यूएशन और कॉम्पिटिशन: कहां खड़ा है BSE?

BSE की ग्रोथ कहानी तो दमदार है, लेकिन इसकी मौजूदा वैल्यूएशन पर भी गौर करना जरूरी है। कंपनी का करेंट पी/ई (Price-to-Earnings) रेश्यो करीब 66.7 से 70.1 के आसपास है, जो कि भारतीय शेयर बाजार के औसत पी/ई ~23.1 से काफी ज्यादा है। अपने मुख्य घरेलू प्रतिद्वंद्वी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की बात करें तो उसका पी/ई रेश्यो 45.8 से 70.1 के बीच है, यानी BSE का वैल्यूएशन NSE के बराबर या थोड़ा ऊपर है। लेकिन, NSE का मार्केट शेयर कई बड़े सेगमेंट्स में काफी मजबूत है, जैसे इक्विटी कैश मार्केट में करीब 94% और इक्विटी ऑप्शन्स में 87%। इसके अलावा, MCX, CDSL और NSDL जैसे दूसरे एक्सचेंज और डेटा प्लेटफॉर्म के पी/ई रेश्यो भी 55 से 110 के पार जा रहे हैं, जो इस सेक्टर में प्रीमियम वैल्यूएशन का संकेत देता है।

ब्रोकरेज की राय और भविष्य की चुनौतियां

पिछले पांच सालों में BSE की कमाई सालाना 50.6% की रफ्तार से बढ़ी है, जो कैपिटल मार्केट्स इंडस्ट्री के एवरेज 21.3% से कहीं ज्यादा है। पिछले एक साल में शेयर ने 56% से ज्यादा और तीन साल में 160% से अधिक का रिटर्न दिया है। वहीं, विश्लेषकों की राय बंटी हुई है। कुछ ब्रोकरेज जैसे Centrum Broking और HDFC Securities ने पॉजिटिव रेटिंग और टारगेट प्राइस बढ़ाए हैं, तो Motilal Oswal जैसी फर्म 'न्यूट्रल' राय रखती हैं। हालांकि, ज्यादातर एनालिस्ट्स 'बाय' रेटिंग दे रहे हैं, लेकिन टारगेट प्राइस ₹2,779 से ₹3,300 तक अलग-अलग हैं।

BSE के रिकॉर्ड हाई को बनाए रखने की राह आसान नहीं होगी। मौजूदा हाई पी/ई रेश्यो का मतलब है कि निवेशकों को शेयर से आगे भी ग्रोथ की बड़ी उम्मीदें हैं। अगर ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ी, तो शेयर में गिरावट आ सकती है। NSE का दबदबा और ट्रांजैक्शन रेवेन्यू पर ज्यादा निर्भरता कुछ चिंताएं पैदा करती हैं। ऐसे में, BSE को अपनी वैल्यूएशन को सही ठहराने और कॉम्पिटिशन में आगे रहने के लिए लगातार नई चीजें करनी होंगी।

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