Q2 FY27 के नतीजों में बाजार का मिला-जुला असर दिखा है। जहाँ BSE और Apollo Hospitals ने शानदार प्रॉफिट दर्ज किया है, वहीं फार्मा कंपनियां Biocon और Zydus Lifesciences मुनाफे के दबाव में दिखीं।
भारतीय बाजार में चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में कंपनियों के प्रदर्शन में भारी अंतर देखने को मिला है। जहाँ फाइनेंस और हेल्थकेयर सेक्टर ने मजबूती दिखाई है, वहीं फार्मा कंपनियों को ग्लोबल स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
BSE और Apollo Hospitals का जलवा
एक्सचेंज ऑपरेटर BSE ने अपने तिमाही नतीजों में दम दिखाया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 45% बढ़कर ₹809.15 करोड़ पर पहुंच गया है, जिसका मुख्य कारण भारतीय कैपिटल मार्केट में ट्रेडिंग एक्टिविटी का बढ़ना है। उधर, Apollo Hospitals ने भी शानदार रफ्तार पकड़ी है। अस्पताल चेन का नेट प्रॉफिट 32% उछलकर ₹630 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू 23% की बढ़त के साथ ₹7,615 करोड़ दर्ज किया गया। हॉस्पिटल में मरीजों की बढ़ती संख्या इसका मुख्य आधार रही है।
फार्मा सेक्टर में हलचल और गिरावट
फार्मा दिग्गज Biocon के लिए यह तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। कंपनी का नेट प्रॉफिट 51% से 57% तक लुढ़क गया है और यह ₹41 करोड़ से ₹57 करोड़ के बीच सिमट गया है। इसके पीछे बढ़ते खर्च और लॉजिस्टिक्स में करीब $20 मिलियन का रेवेन्यू नुकसान जिम्मेदार है। वहीं, Zydus Lifesciences का नेट प्रॉफिट 26.6% घटकर ₹925.5 करोड़ रह गया है। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन भी घटकर 20% पर आ गया है, क्योंकि रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतों और रेगुलेटरी कंप्लायंस खर्च ने मार्जिन पर कैंची चलाई है।
निवेशकों के लिए सबक
ये नतीजे बताते हैं कि घरेलू मांग पर टिकी कंपनियों का प्रदर्शन अभी भी स्थिर है, जबकि वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ी फार्मा कंपनियां दबाव में हैं। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या फार्मा कंपनियां अपनी लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों को सुलझा पाती हैं या नहीं।
