IPO के बाद शेयर में तूफानी तेजी
Aye Finance, जो एक नई लिस्टेड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है, ने मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को शेयर बाजार में शानदार तेजी दिखाई। स्टॉक 9.22% तक चढ़ गया और NSE पर ₹140.80 के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। यह तब हुआ जब बेंचमार्क निफ्टी 50 लगभग सपाट था। कंपनी का शेयर IPO इश्यू प्राइस ₹129 से करीब 9.14% ऊपर ट्रेड कर रहा था। सुबह तक, लगभग 3.08 मिलियन शेयर, जिनकी वैल्यू ₹45 करोड़ थी, ट्रेड हो चुके थे। 17 फरवरी तक कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹3,489.28 करोड़ था। लिस्टिंग वाले दिन (16 फरवरी) शेयर का डेब्यू फ्लैट रहा था।
कंपनी का बिजनेस और सेक्टर
Aye Finance माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को लोन देने वाली एक NBFC है। इसका बिजनेस मॉडल छोटे व्यवसायों के लिए क्रेडिट गैप को भरने का है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के फर्स्ट हाफ में 21.8% का मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज किया है। यह 21 राज्यों और यूनियन टेरिटरीज में 526 ब्रांचों के साथ काम करती है, जो इसका एक बड़ा भौगोलिक विस्तार दर्शाता है।
अगर इसके साथियों SBFC Finance और Five-Star Business Finance से तुलना करें, तो Aye Finance के पास ज्यादा ब्रांचेज हैं, लेकिन प्रति ब्रांच एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) कम है। हालांकि, Aye Finance अपनी 29.10% की हाई यील्ड ऑन एडवांसेज और 15.31% के मजबूत नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) से अलग दिखती है। NBFC सेक्टर में 15-17% की ग्रोथ की उम्मीद है, जिसमें MSME लेंडिंग एक बड़ा ड्राइवर है। सरकारी पहलों और RBI की दर कटौती से सेक्टर को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। IPO के समय कंपनी का वैल्यूएशन 14x (FY25 अर्निंग्स पर) था, जो साथियों से सस्ता माना जा रहा था। पोस्ट-लिस्टिंग, P/E रेशियो बढ़कर 43.99x हो गया है, और प्राइस-टू-बुक रेशियो 1.15x है।
चिंता की वजहें (Bear Case)
मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ और मार्केट के उत्साह के बावजूद, कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। FY26 के फर्स्ट हाफ में नेट प्रॉफिट में 40% की भारी साल-दर-साल गिरावट प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव का संकेत देती है। इसके अलावा, कंपनी का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेश्यो बढ़ा है, जो मार्च 2023 में 2.49% से बढ़कर मार्च 2025 में 4.21% और सितंबर 2025 तक 4.85% हो गया। प्रोविजन कवरेज रेशियो (PCR) 67.56% पर मजबूत है, लेकिन GNPA में वृद्धि एसेट क्वालिटी में संभावित गिरावट का संकेत है।
IPO में निवेशकों की दिलचस्पी औसत रही, कुल सबस्क्रिप्शन 0.97x था, जिसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) का योगदान 1.50x, रिटेल इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स (RIIs) का 0.77x और नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) का सिर्फ 0.05x था। एनालिस्ट रवि सिंह (Master Capital Services) ने सलाह दी है कि मौजूदा निवेशक ओवरस्ट्रेच्ड वैल्यूएशन और संभावित शॉर्ट-टर्म करेक्शन के कारण एग्जिट पर विचार करें। उन्होंने एसेट क्वालिटी और फंड की लागत पर नजर रखने की जरूरत बताई। शिवानी न्यติ (Swastika Investmart) ने प्रॉफिट में गिरावट और कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए एक न्यूट्रल से सावधान नजरिया रखने की सलाह दी। कंपनी पर 3.04 के डेट-टू-इक्विटी रेशियो के साथ एक महत्वपूर्ण कर्ज का बोझ भी है, जो फंड की लागत में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है।
आगे की राह
Aye Finance IPO से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल अपनी कैपिटल बेस को मजबूत करने और भविष्य के बिजनेस व एसेट एक्सपेंशन में सपोर्ट करने के लिए करेगी। कंपनी MSME लेंडिंग सेगमेंट में काम करती है, जिसमें लंबी अवधि में विकास की काफी संभावनाएं हैं। हालांकि, इसकी सफलता बढ़ती एसेट क्वालिटी रिस्क को मैनेज करने, ऑपरेटिंग खर्चों को नियंत्रित करने और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपटने की क्षमता पर निर्भर करेगी। लॉन्ग-टर्म में पैसा लगाने से पहले निवेशकों को एसेट क्वालिटी और अर्निंग्स की स्थिरता पर नजर रखनी चाहिए।