Axis Bank की सब्सिडियरी Freecharge Payment Technologies को RBI से पेमेंट एग्रीगेटर के तौर पर काम करने की 'इन-प्रिंसिपल' मंजूरी मिल गई है। इससे बैंक अब ऑनलाइन और फिजिकल पेमेंट प्रोसेस कर सकेगा, जिससे उसके मर्चेंट सर्विस नेटवर्क में बड़ा विस्तार होगा।
मर्चेंट सर्विसेज का होगा विस्तार
इस लाइसेंस के मिलने के साथ ही Freecharge अब ग्राहकों और मर्चेंट्स के बीच एक मजबूत ब्रिज की तरह काम करेगी। यह Axis Bank की डिजिटल रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है। बैंक फिलहाल टर्मिनल एक्वायरिंग में 25.7% मार्केट शेयर रखता है और उसकी UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में पिछले साल के मुकाबले 34% की जोरदार बढ़त देखी गई है। अब पेमेंट एग्रीगेशन सर्विसेज जुड़ने से बैंक अपने मर्चेंट बेस को तेजी से बढ़ा सकेगा।
बाजार में कड़ी टक्कर और चुनौतियां
पेमेंट एग्रीगेटर के क्षेत्र में Razorpay, Cashfree और PayU जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से ही मौजूद हैं, जिससे मुकाबला काफी कड़ा है। यह बिजनेस पूरी तरह से वॉल्यूम पर टिका है, जहाँ मार्जिन काफी कम होते हैं। साथ ही, RBI के कड़े नियम और कंप्लायंस स्टैंडर्ड्स का पालन करना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी पर होने वाले खर्च का असर शॉर्ट टर्म में मुनाफे पर दिख सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
बैंक का डिजिटल मॉडल तेजी से बढ़ रहा है, जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके मोबाइल ऐप के 1.6 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं, जिनमें 1.2 करोड़ गैर-Axis बैंक ग्राहक हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी Freecharge को अपने नेटवर्क में कितनी कुशलता से इंटीग्रेट करती है। साथ ही, Hitachi Payment Services के साथ मिलकर AI-पावर्ड साउंडबॉक्स जैसी नई तकनीक पर जो निवेश किया जा रहा है, उसका असर आने वाले समय में बैंक की फाइनेंशियल हेल्थ और फीस-बेस्ड इनकम पर कैसे पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
