एनालिस्ट ने Axis Bank का टारगेट बढ़ाया
ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Axis Bank के शेयर पर अपना भरोसा जताते हुए टारगेट प्राइस को ₹1,500 से बढ़ाकर ₹1,600 कर दिया है। उन्होंने 'BUY' रेटिंग भी बरकरार रखी है। यह तब हुआ है जब हालिया तिमाही में बैंक के नतीजे मिले-जुले रहे। हालांकि, बैंक की फी इनकम (Fee Income) और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार दिखा, लेकिन नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) उम्मीदों से कम रही और ऑपरेशनल खर्च (Operational Expenses) बढ़ गए। इन ख़बरों के बीच Axis Bank के शेयर में 0.5% के आसपास की तेजी देखी गई।
लोन ग्रोथ के टारगेट के सामने डिपॉजिट की चुनौती
इस पॉजिटिव आउटलुक (Outlook) की एक बड़ी वजह लोन ग्रोथ (Loan Growth) को लेकर उम्मीदों में बढ़ोतरी है। एनालिस्ट फर्म ने फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के लिए लोन ग्रोथ के अनुमान को 1% बढ़ाकर 13% सालाना कर दिया है। यह तब है जब पिछली तिमाही में NII ग्रोथ सिर्फ 1.2% थी, जबकि लोन ग्रोथ 6.4% रही। बैंक के पास मजबूत कैपिटल पोजीशन है, जिसमें CET-1 रेशियो लगभग 15%, लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) 92% और लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) 117% है। लेकिन, रिपोर्ट साफ कहती है कि इस महत्वाकांक्षी लोन ग्रोथ को हासिल करने के लिए बैंक को लगातार कस्टमर डिपॉजिट (Customer Deposits) बढ़ाने होंगे। भारतीय बैंकों के लिए लोन के साथ-साथ डिपॉजिट ग्रोथ सुनिश्चित करना लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए बेहद अहम है।
वैल्यूएशन और मार्जिन पर नजर
Prabhudas Lilladher ने FY27 और FY28 के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) के अनुमान को औसतन 0.10% कम किया है। हालांकि, उनका मानना है कि लोन, फी इनकम और मैनेज्ड ऑपरेटिंग एक्सपेंस (Managed Operating Expenses) में बढ़ोतरी से इस कमी की भरपाई हो जाएगी। कोर प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) के अनुमानों में करीब 2% की कमी की गई है। बैंक का वैल्यूएशन मल्टीपल (Valuation Multiple) 1.7 गुना प्राइस-टू-बुक वैल्यू (Price-to-Book Value) पर बना हुआ है। Axis Bank का मौजूदा P/E रेशियो करीब 22x है, जो ICICI Bank (23x) और HDFC Bank (25x) के आसपास है, लेकिन SBI (18x) से ज्यादा है।
प्रमुख रिस्क: डिपॉजिट जुटाना और फंडिंग कॉस्ट
हालांकि टारगेट बढ़ाया गया है, पर कुछ बड़े रिस्क (Risks) बने हुए हैं। 13% की लोन ग्रोथ का टारगेट, बैंक पर डिपॉजिट जुटाने का भारी दबाव डालेगा। आजकल की कॉम्पिटिटिव बैंकिंग मार्केट (Competitive Banking Market) में कम लागत वाले डिपॉजिट मिलना मुश्किल है, जिससे बैंक के फंडिग खर्च (Funding Expenses) बढ़ सकते हैं। अगर डिपॉजिट ग्रोथ धीमी रही, तो बैंक को महंगे फंड पर निर्भर रहना पड़ेगा, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ेगा और लोन ग्रोथ भी धीमी पड़ सकती है। बैंक ने ₹20 अरब के बफर प्रोविजन्स (Buffer Provisions) अलग रखे हैं, जो भविष्य में क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) को लेकर एक सतर्क रवैया दिखा सकते हैं। ₹1,600 का टारगेट प्राइस शायद इस चुनौती को पूरी तरह से न दर्शाता हो, क्योंकि डिपॉजिट जुटाना एक मुश्किल काम हो सकता है।
आगे का रास्ता: डिपॉजिट पर फोकस और एनालिस्ट की राय
Axis Bank का मैनेजमेंट भी मानता है कि डिपॉजिट बढ़ाना एक प्रमुख स्ट्रेटेजिक गोल (Strategic Goal) है। जहां Prabhudas Lilladher पॉजिटिव हैं, वहीं दूसरे एनालिस्ट थोड़ा सतर्क दिख रहे हैं। बैंक की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कॉम्पिटिटिव फंडिंग एनवायरनमेंट (Competitive Funding Environment) को कितनी अच्छी तरह मैनेज करता है और अपने मजबूत कैपिटल बेस का इस्तेमाल करके FY27 और FY28 तक स्थिर और मुनाफे वाली लोन ग्रोथ हासिल कर पाता है या नहीं। भारतीय बैंकिंग सेक्टर में ओवरऑल मॉडरेट ग्रोथ की उम्मीद है, और रेगुलेटर्स क्रेडिट एक्सपेंशन (Credit Expansion) और एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
