Axis Bank के शेयर आज सोमवार को **5%** की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब बैंक ने **₹7,114 करोड़** का दमदार पहली तिमाही का मुनाफ़ा दर्ज किया है। निवेशकों को मजबूत एसेट क्वालिटी तो दिखी, लेकिन लेंडिंग मार्जिन को लेकर चिंताएं हावी रहीं।
पहली तिमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?
Axis Bank ने 30 जून, 2026 को समाप्त हुई तिमाही में पिछले साल की तुलना में 23% की वृद्धि के साथ ₹7,114 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) कमाया है। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों से कहीं बेहतर था, लेकिन शेयर की चाल सुस्त रही। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (Net Interest Income) में भी 8% का इजाफा हुआ और यह ₹14,646 करोड़ रही।
एसेट क्वालिटी में सुधार, लेकिन...
सबसे अच्छी बात यह रही कि बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार देखने को मिला। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) यानी फंसे कर्ज का अनुपात घटकर 1.28% रह गया, जो पिछले साल 1.57% था। वहीं, नेट NPA भी घटकर 0.39% पर आ गया। इससे पता चलता है कि बैंक अपने लोन पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से मैनेज कर रहा है और क्रेडिट कॉस्ट (Credit Cost) 0.7% पर कम बनी हुई है।
कॉर्पोरेट लेंडिंग का मार्जिन पर असर
मुनाफे में बढ़ोतरी के बावजूद, बाजार की नकारात्मक प्रतिक्रिया का मुख्य कारण बैंक के लोन पोर्टफोलियो में आया बदलाव है। हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि बैंक अब कॉर्पोरेट लेंडिंग (Corporate Lending) पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। बैंकिंग सेक्टर में, आमतौर पर रिटेल लोन की तुलना में कॉर्पोरेट लोन पर ब्याज दरें कम होती हैं। अगर बैंक इस सेगमेंट पर ज्यादा निर्भर होता है, तो उसके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि भले ही इससे बैलेंस शीट मजबूत हो, लेकिन अगले फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही तक मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। निवेशक इस ग्रोथ को पतले मार्जिन के साथ कैसे बैलेंस करेंगे, यह देखने वाली बात होगी।
ब्रोकरेजेज की राय
ग्लोबल रिसर्च फर्मों ने नतीजों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। Jefferies ने ऑपरेटिंग एक्सपेंस (Operating Expenses) को बेहतर ढंग से मैनेज करने और कम क्रेडिट कॉस्ट को देखते हुए पॉजिटिव आउटलुक (Outlook) बनाए रखा है। वहीं, Bernstein ने तिमाही नतीजों को मिला-जुला बताया है। कंपनी ने बैलेंस शीट की मजबूत ग्रोथ को स्वीकार किया, लेकिन मार्जिन में आई कमी और नॉन-इंटरेस्ट इनकम (Non-Interest Income) में कमजोरी को परफॉर्मेंस में बाधा माना है। आने वाले समय में बैंक अपने डिपॉजिट बेस (Deposit Base) और प्राइसिंग स्ट्रेटेजी (Pricing Strategy) को कैसे मैनेज करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
