टैक्स के सहारे मुनाफे की कहानी, पर गहरी पड़ताल जरूरी
Axis Bank ने Q4 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, जो एक तरफ तो टैक्स लाभ के कारण शानदार दिख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर साल-दर-साल के आधार पर मुनाफे में गिरावट को छिपा रहे हैं। हालांकि, कंपनी के कोर परफॉर्मेंस और एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है, लेकिन बढ़ी हुई प्रोविजन्स और पूरे साल के कम हुए मुनाफे पर ध्यान देना होगा।
नतीजों पर एक नज़र
बैंक ने Q4 FY26 के लिए ₹7,071 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछली तिमाही से 9% अधिक है, लेकिन पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में 0.6% कम है। तिमाही-दर-तिमाही वृद्धि में ₹2,193.2 करोड़ के टैक्स बेनिफिट का बड़ा हाथ है। यह लाभ सिटी अधिग्रहण से मिली इनटैंगिबल एसेट्स पर डेप्रिसिएशन और डेफ़र्ड टैक्स एसेट्स के रिकग्निशन के कारण मिला। इसके बिना, साल-दर-साल मुनाफे में गिरावट और भी ज़्यादा होती।
नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में साल-दर-साल 4.7% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹14,457 करोड़ पर पहुंच गई, जो विश्लेषकों के अनुमान से थोड़ा कम रहा। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में तिमाही-दर-तिमाही मामूली गिरावट आई, जो 3.64% से घटकर 3.62% हो गया। वहीं, एसेट क्वालिटी में सुधार दिखा। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) पिछले तिमाही के 1.40% से घटकर 1.23% पर आ गए, और नेट NPAs भी 0.42% से घटकर 0.37% हो गए। लेकिन, कुल प्रोविजन्स साल-दर-साल दोगुने से ज़्यादा होकर ₹3,522 करोड़ पर पहुंच गए। इसका मुख्य कारण ₹2,001 करोड़ का एक एहतियाती बफर था, जो संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) के लिए रखा गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए नेट प्रॉफिट घटकर ₹24,457 करोड़ रह गया, जो FY25 में ₹26,374 करोड़ था।
विश्लेषकों की राय और वैल्यूएशन
Axis Bank का मार्केट कैपिटलाइजेशन फिलहाल लगभग ₹4.24 लाख करोड़ है। इसका प्राइस-टु-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 16.03-16.25 के आसपास है। यह वैल्यूएशन HDFC Bank (P/E 16.05-19.10) और ICICI Bank (P/E 16.48-18.43) जैसे अपने प्रतिद्वंद्वियों के बराबर है। State Bank of India (SBI) का P/E रेश्यो 11.18-12.85 के निचले स्तर पर है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर का औसत P/E लगभग 12.6 है, जबकि बैंक निफ्टी इंडेक्स का P/E करीब 14.8 है। इससे पता चलता है कि Axis Bank का वैल्यूएशन सेक्टर के औसत से थोड़ा ऊपर लेकिन बड़े प्राइवेट बैंकों के बराबर है।
ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म्स का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है। Kotak Securities ने ₹1,600 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' रेटिंग दी है, Jefferies ने ₹1,700 पर 'Buy' बरकरार रखा है, और Morgan Stanley ने ₹1,575 के टारगेट के साथ 'Overweight' कॉल दी है। ये एनालिस्ट्स बैंक के स्टेबल कोर परफॉर्मेंस, बिज़नेस सेगमेंट्स में ग्रोथ और बेहतर हो रही एसेट क्वालिटी को मुख्य ताकत बता रहे हैं। हालांकि, वे NIMs और ऑपरेटिंग कॉस्ट्स पर दबाव का भी ज़िक्र कर रहे हैं। हाल ही में Fitch Ratings ने Axis Bank के आउटलुक को पॉजिटिव किया है और फरवरी 2026 में अपनी वायबिलिटी रेटिंग (VR) को 'bb+' तक बढ़ाया है, जो बैंक की वित्तीय प्रोफाइल में सुधार का संकेत है।
प्रोविजन्स और ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर चिंता
Q4 FY26 में तिमाही-दर-तिमाही सुधार और बड़े टैक्स लाभ के बावजूद, साल-दर-साल मुनाफे में आई गिरावट और पूरे साल के कम हुए नेट प्रॉफिट पर ध्यान देना ज़रूरी है। कुल प्रोविजन्स 139% साल-दर-साल बढ़कर ₹3,522 करोड़ हो गए। इसमें से एक बड़ा हिस्सा ₹2,001 करोड़ भू-राजनीतिक जोखिमों के खिलाफ एहतियाती बफर के तौर पर रखा गया। यह प्रोविजनिंग बैंक की बैलेंस शीट को मज़बूत करती है, लेकिन सीधे तौर पर रिपोर्टेड मुनाफे को कम करती है। बैंक ने ₹606 करोड़ का ट्रेडिंग लॉस और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 7% साल-दर-साल की गिरावट के साथ ₹10,013 करोड़ दर्ज किया, जो नॉन-इंटरेस्ट इनकम और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर दबाव को दर्शाता है।
भविष्य की योजनाएं और आउटलुक
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में शेयर की कीमत ₹1,280–₹1,340 के बीच रह सकती है, जो मौजूदा स्तरों से कुछ बढ़त का संकेत देता है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि NIMs जल्द ही स्थिर हो जाएंगे और Q4FY26 या Q1FY27 तक निचले स्तर पर पहुंच जाएंगे। मध्यम अवधि में इन्हें वापस 3.8% के आसपास लाने का लक्ष्य है। बैंक कैपिटल जुटाने की भी प्रक्रिया में है, जिसके तहत ₹1,500 करोड़ Axis Finance में निवेश किए जाएंगे। यह टियर-1 कैपिटल को मजबूत करेगा और लेंडिंग ग्रोथ को सपोर्ट करेगा। आने वाले समय में मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताएं, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का दबाव और बढ़ी हुई प्रोविजन्स का प्रबंधन प्रमुख चुनौतियां हो सकती हैं।
