Axis Bank अपने सितंबर तिमाही के नतीजे **17 अक्टूबर** को जारी करने वाला है। अनुमान है कि बैंक का नेट प्रॉफिट **37% से 43%** तक बढ़ सकता है। हालांकि, लोन बुक में मजबूती के बावजूद मार्केट की नजर इस बात पर है कि बैंक अपने मार्जिन और फंडिंग कॉस्ट को कैसे संभालता है।
मुनाफे का दमदार गणित
Axis Bank के लिए यह तिमाही काफी अहम रहने वाली है। बाजार के जानकारों का मानना है कि बैंक का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल 37% से 43% तक बढ़ सकता है। यह ग्रोथ ऐसे समय में आ रही है जब पूरा बैंकिंग सेक्टर लिक्विडिटी और ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से जूझ रहा है।
मार्जिन पर दबाव की आहट
भले ही प्रॉफिट के आंकड़े लुभावने लगें, लेकिन इन्वेस्टर्स की सबसे बड़ी चिंता 'नेट इंटरेस्ट मार्जिन' (NIM) को लेकर है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इसमें 7 से 12 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके पीछे मुख्य वजह फॉरेन करेंसी डिपॉजिट्स जुटाने की रणनीति और कॉरपोरेट लेंडिंग का बढ़ना है, जिससे फंड्स की लागत बढ़ जाती है।
लोन ग्रोथ में तेजी बरकरार
बैंक का बिजनेस ऑपरेशन काफी मजबूत दिख रहा है। रिटेल, SME और कॉरपोरेट सेगमेंट में डिमांड के चलते लोन ग्रोथ 19% से 22.7% रहने का अनुमान है। बैंक के क्रेडिट कॉस्ट और ऑपरेटिंग एक्सपेंसेस पर नियंत्रण होने से मुनाफा सुरक्षित रहने की उम्मीद है।
एसेट क्वालिटी की स्थिति
इन्वेस्टर्स एसेट क्वालिटी को लेकर भी आश्वस्त दिख रहे हैं। अनुमान है कि ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 1.3% के आसपास स्थिर रहेंगे, जबकि नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NNPA) 0.4% पर बने रह सकते हैं। यह दर्शाता है कि बैंक ने अपने रिस्क मैनेजमेंट को बहुत प्रभावी तरीके से संभाला है।
अब देखना यह होगा कि नतीजों के बाद मैनेजमेंट भविष्य के लिए मार्जिन और डिपॉजिट्स को लेकर क्या गाइडेंस देता है।
