Axis Bank ने सितंबर 2026 तिमाही के प्रोविजनल आंकड़े जारी कर दिए हैं। बैंक के एडवांसेज में **22.7%** और डिपॉजिट्स में **20.7%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। RBI की FCNR(B) स्वैप सुविधा का लाभ उठाते हुए बैंक ने अपनी लिक्विडिटी को मजबूत किया है।
बिजनेस ग्रोथ और आंकड़े
Axis Bank ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही (30 सितंबर 2026 तक) के अपने बिजनेस अपडेट में मजबूती दिखाई है। बैंक के ग्रॉस एडवांसेज बढ़कर ₹13.85 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गए हैं, जो सालाना आधार पर 22.7% की बढ़त है। इसी तरह, बैंक के टोटल डिपॉजिट्स 20.7% उछलकर ₹14.52 लाख करोड़ हो गए हैं।
RBI स्वैप का फायदा
इस ग्रोथ के पीछे बैंक की एक सोची-समझी रणनीति रही है। बैंक ने Reserve Bank of India (RBI) की फॉरेन करेंसी स्वैप विंडो का चतुराई से उपयोग करते हुए $10.62 बिलियन के FCNR(B) डिपॉजिट्स जुटाए हैं। इससे बैंक को अपनी लिक्विडिटी सुधारने और महंगे डोमेस्टिक टर्म डिपॉजिट्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। यही वजह है कि डोमेस्टिक नॉन-रिटेल टर्म डिपॉजिट्स में 8.6% की कमी आई है, जो मार्जिन बचाने के लिए एक बेहतर कदम है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
हालांकि हेडलाइन ग्रोथ 22.7% है, लेकिन बैंक ने स्पष्ट किया है कि इंटरनेशनल लीवरेजिंग फैसिलिटीज को हटा दें, तो कोर ग्रॉस एडवांसेज में 18.8% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब है कि ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल लिक्विडिटी ऑपरेशंस से आया है, न कि सिर्फ डोमेस्टिक लोन डिमांड से।
क्या है रिस्क?
इतनी ज्यादा लिक्विडिटी आने के बाद बैंक के सामने चुनौती होगी इसे सही जगह इन्वेस्ट करने की। अगर बैंक जल्दबाजी में लोन बांटता है, तो एसेट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। साथ ही, बैंक की यह रणनीति काफी हद तक RBI की स्वैप सुविधा पर टिकी है। अगर भविष्य में इसमें कोई बदलाव आता है, तो बैंक की कॉस्ट ऑफ फंड्स प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, 5 अक्टूबर 2026 तक शेयर ₹1,234 के आसपास ट्रेड कर रहा है, और आने वाली तिमाहियों में बैंक का एसेट क्वालिटी पर फोकस ही असली गेम चेंजर होगा।
