Axis Bank के चौथी तिमाही के नतीजे मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। जहां एक तरफ 9% की जोरदार उछाल के साथ नेट प्रॉफिट ₹7,071 करोड़ रहा, वहीं दूसरी ओर यह मुख्य रूप से सिटी (Citi) के कंज्यूमर बिजनेस अधिग्रहण से जुड़े ₹2,193.2 करोड़ के टैक्स क्रेडिट (tax credit) के कारण संभव हुआ। इस स्पेशल आइटम के बिना, पिछले साल की इसी तिमाही की तुलना में प्रॉफिट में गिरावट आती। बैंक की मुख्य आय, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 5% बढ़कर ₹14,457 करोड़ रही, लेकिन यह एनालिस्ट्स के ₹14,727 करोड़ के अनुमान से कम थी। इसी तरह, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछली तिमाही के 3.64% से घटकर 3.62% पर आ गया।
मार्जिन पर दबाव, पर लोन ग्रोथ की रफ्तार तेज
इसके बावजूद, बैंक की बिजनेस मोमेंटम मजबूत बनी हुई है। ग्रॉस एडवांसेज (gross advances) सालाना आधार पर 19% बढ़कर ₹12,33,570 करोड़ हो गए। यह ग्रोथ कॉर्पोरेट लोन में 38%, एसएमई (SME) लोन में 24% और रिटेल लोन में 8% रही। कुल नेट एडवांसेज में रिटेल सेगमेंट का हिस्सा 55% तक पहुंच गया है। डिपॉजिट्स में भी 14% की सालाना ग्रोथ दिखी, जिससे CASA रेशियो सुधरकर 40% हो गया। मार्जिन पर दबाव के बावजूद यह ग्रोथ हासिल की गई। तुलनात्मक रूप से, आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) ने 17.7% की सालाना प्रॉफिट ग्रोथ और 4.32% का मजबूत NIM दर्ज किया, जबकि एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) का नेट प्रॉफिट 9% बढ़ा, लेकिन उसका NIM 3.38% रहा। एक्सिस बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ, ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) घटकर 1.23% और नेट एनपीए (Net NPAs) 0.37% पर आ गए।
प्रोविजनिंग में बड़ी वृद्धि, मैनेजमेंट की चिंता?
हालांकि, एक अहम चिंता प्रोविजन्स (provisions) और कंटिंजेंसी (contingencies) में सालाना आधार पर भारी बढ़ोतरी है। ये बढ़कर ₹3,522 करोड़ हो गए, जो पिछले साल के ₹1,359 करोड़ से काफी ज्यादा हैं। इसके अलावा, ₹2,001 करोड़ का एक स्टैंडर्ड एसेट प्रोविजन भी किया गया। यह बढ़ोतरी मैनेजमेंट की आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रति सतर्कता का संकेत देती है, भले ही GNPA रेशियो बेहतर हो। ये ज्यादा प्रोविजनिंग, भले ही समझदारी भरी हो, मौजूदा मुनाफे को कम कर रही है। ऐसे में, भले ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा है, लेकिन वैश्विक महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों का असर दिखेगा। फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने भारतीय बैंकों के मार्जिन पर 20-30 बेसिस पॉइंट की गिरावट की आशंका जताई है, जिसका कारण लिक्विडिटी में कमी और बढ़ती फंडिंग लागत है। एनालिस्ट्स को सिटी डील से इंटीग्रेशन रिस्क और प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में वैल्यूएशन गैप भी दिख रहा है, जिससे निकट भविष्य में नतीजों पर थोड़ा असर दिख सकता है।
एनालिस्ट्स का नजरिया
एनालिस्ट्स का एक्सिस बैंक पर आम तौर पर पॉजिटिव रुख है, और अगले 12 महीनों के लिए उनके टारगेट प्राइस में अपसाइड की गुंजाइश दिख रही है। बैंक भविष्य की ग्रोथ या बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए बड़े फंड जुटाने पर भी विचार कर रहा है।
