Axis Bank अब 'जीरो-ऑप्स' रणनीति को बड़े स्तर पर लागू कर रहा है। बैंक अपने कामकाज को पूरी तरह ऑटोमेट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रहा है, जिसके चलते FY26 के अंत तक लगभग **3,000** कर्मचारियों की छंटनी की जा सकती है।
ऑटोमेशन की ओर बड़ा कदम
बैंक अपनी बैंकिंग सेवाओं में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए 'जीरो-ऑप्स' (Zero-Ops) अप्रोच अपना रहा है। इस डिजिटल बदलाव के जरिए बैंक अपने बैकएंड ऑपरेशंस और कस्टमर इंटरेक्शन को पूरी तरह से AI के हवाले करने की तैयारी में है। बैंक का मानना है कि इन बदलावों से न केवल काम की रफ्तार बढ़ेगी बल्कि गलतियों (errors) में भी कमी आएगी।
टेक्नोलॉजी और इन-हाउस डेवलपमेंट
अपनी तकनीक को मजबूत करने के लिए बैंक ने अपनी सहायक कंपनी Freecharge को कोर टेक हब बनाया है। बाहरी वेंडर्स पर निर्भर रहने के बजाय बैंक अपना सॉफ्टवेयर खुद तैयार कर रहा है। फिलहाल, AI का इस्तेमाल ग्राहकों के री-KYC (re-KYC) और SME लोन के क्रेडिट असेसमेंट जैसे कामों में किया जा रहा है।
फाइनेंशियल सेहत और मार्जिन का दबाव
बैंक ने हाल ही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। FY27 की पहली तिमाही में नेट प्रॉफिट ₹7,114 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 22.5% अधिक है। हालांकि, निवेशकों की नजर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर टिकी है, जो घटकर 3.46% रह गया है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच मुनाफा बनाए रखना बैंक के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आगे क्या होगा?
रेगुलेटरी मोर्चे पर एक अच्छी खबर यह है कि Max Life Insurance शेयर खरीदारी मामले में SEBI की कार्यवाही बंद हो गई है, जिससे निवेशकों का डर कम हुआ है। अब बाजार की नजर 8-9 सितंबर, 2026 को होने वाली इन्वेस्टर मीटिंग्स पर है, जहां बैंक USD 600 मिलियन के AT1 नोट्स के रिडेम्पशन की प्रक्रिया को लेकर चर्चा करेगा। अब देखना यह होगा कि क्या ऑटोमेशन से होने वाली बचत, मार्जिन पर पड़ रहे दबाव को झेलने में कामयाब रहती है या नहीं।
