Axis Bank के CEO अमिताभ चौधरी ने साल 2026 के अंत तक RBI द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने का संकेत दिया है। करेंसी स्टेबिलिटी बनाए रखने के साथ-साथ उन्होंने बैंकों के लिए लेंडिंग रिस्क को लेकर बड़ी चेतावनी भी जारी की है।
आरबीआई का रुख और ब्याज दरें
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान Axis Bank के एमडी और सीईओ अमिताभ चौधरी ने साफ किया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) साल के अंत तक अपने रुख में बदलाव कर सकता है। उन्होंने अक्टूबर या दिसंबर 2026 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इसका मुख्य कारण भारत और अमेरिका के बीच कम होते इंटरेस्ट रेट गैप के बीच करेंसी की स्थिरता को बनाए रखना है। हालांकि अभी रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है, लेकिन ग्लोबल इकोनॉमिक दबाव के कारण केंद्रीय बैंक को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
लिक्विडिटी और लेंडिंग का रिस्क
अमिताभ चौधरी ने बैंकिंग सेक्टर में बढ़ रही लिक्विडिटी को लेकर चिंता जताई है। RBI की हालिया स्वैप सुविधा के बाद से FCNR(B) डिपॉजिट में भारी उछाल आया है, जो 31 अगस्त 2026 तक $127.2 बिलियन के आंकड़े पर पहुंच गया है।
बैंकों के पास पूंजी तो बढ़ गई है, लेकिन असली चुनौती इसका सही इस्तेमाल करने की है। चौधरी ने इसे 'एबनॉर्मल लेंडिंग' (Abnormal Lending) का रिस्क करार दिया है। उनका मानना है कि जब बैंकों के पास सरप्लस पैसा होता है, तो उसे निवेश करने का दबाव बढ़ जाता है। इस जल्दबाजी में बैंक अपनी लेंडिंग स्टैंडर्ड्स से समझौता कर सकते हैं, जिससे भविष्य में बेड लोन (Bad Loans) का खतरा बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
Axis Bank के शेयर जो करीब ₹1,245 के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, उनके लिए यह लिक्विडिटी डायनामिक्स एक बड़ा फैक्टर है। निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि ज्यादा लिक्विडिटी से क्रेडिट ग्रोथ तो मिल सकती है, लेकिन इसके साथ ही नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) और लोन बुक की क्वालिटी को मेंटेन रखना भी जरूरी है। आने वाले समय में बाजार की नजरें मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की मीटिंग मिनट्स और RBI के अगले फैसलों पर टिकी होंगी।
