Axis Bank ने HDFC Bank के पूर्व एग्जीक्यूटिव Rahul Shukla को अपना नया ग्रुप हेड (Commercial and Bharat Banking) नियुक्त किया है। **30 साल** से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शुक्ला अब रूरल, सेमी-अर्बन और MSME पोर्टफोलियो को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
नई रणनीति और फोकस
Axis Bank ने 19 अक्टूबर से राहुल शुक्ला को कमर्शियल और भारत बैंकिंग डिवीजनों की कमान सौंप दी है। यह बदलाव साफ तौर पर दिखाता है कि बैंक अब छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है। बैंक का मानना है कि छोटे बाजारों में क्रेडिट की मांग बहुत ज्यादा है, जिसे भुनाने के लिए एक अनुभवी लीडर की जरूरत थी।
क्यों चुना गया Rahul Shukla को?
राहुल शुक्ला के पास बैंकिंग का 30 साल से ज्यादा का तजुर्बा है। इससे पहले वे HDFC Bank में कमर्शियल और रूरल बैंकिंग के प्रमुख थे और Citibank में भी लंबे समय तक कॉरपोरेट बैंकिंग संभाल चुके हैं। HDFC Bank में रूरल फ्रेंचाइजी खड़ी करने में उनकी अहम भूमिका को देखते हुए, Axis Bank उन्हें अपने पोर्टफोलियो का 'मास्टरमाइंड' मान रहा है।
'Asset-led Liability' मॉडल
बैंक अब एक नई अप्रोच पर काम करेगा। इसके तहत, पहले ग्रामीण व्यापारियों और MSMEs को लोन (Asset) देकर उन्हें ग्राहक बनाया जाएगा और फिर उन्हें डिपॉजिट्स (Liability) यानी सेविंग्स और करंट अकाउंट्स से जोड़ा जाएगा। यह कम लागत वाली रिटेल डिपॉजिट जुटाने का एक स्मार्ट तरीका है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को यह समझना होगा कि रूरल बैंकिंग में कदम रखना आसान नहीं है। वहां का बाजार काफी प्रतिस्पर्धी है, जहां पहले से ही कई बड़े प्राइवेट बैंक और Small Finance Banks मौजूद हैं। ऑपरेशनल एफिशिएंसी बनाए रखना और छोटे कर्जदारों के रिस्क को मैनेज करना बैंक के लिए बड़ी चुनौती होगी। बैंक की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि वह अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके लागत को कितना कम रख पाता है और खराब लोन (Delinquency) को कैसे कंट्रोल करता है।
