Aviva PLC ने अपनी भारतीय लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में Dabur Invest Corp की बची हुई **26%** हिस्सेदारी खरीद ली है। इस डील के बाद Aviva अब अपनी भारतीय यूनिट का **100%** मालिक बन गई है, जो भारत में बीमा क्षेत्र में पूर्ण विदेशी स्वामित्व की अनुमति देने वाले हालिया नियमों के बाद पहला मामला है।
Aviva का भारतीय बाज़ार पर पूरा कंट्रोल
ब्रिटिश इंश्योरेंस दिग्गज Aviva PLC ने अपनी भारतीय लाइफ इंश्योरेंस ऑपरेशंस का पूरा कंट्रोल हासिल कर लिया है। कंपनी ने अपने लोकल पार्टनर Dabur Invest Corp की बाकी बची 26% हिस्सेदारी खरीद ली है। इस अधिग्रहण के साथ ही Aviva भारत में अपनी यूनिट की 100% मालकिन बन गई है। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार ने हाल ही में बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश की इजाज़त दी है।
साझेदारी का अंत और नई शुरुआत
साल 2001 में शुरू हुई यह पार्टनरशिप अब खत्म हो गई है। पूरी तरह से अपनी सहायक कंपनी (wholly-owned subsidiary) बनने के बाद, Aviva अब अपनी रणनीतिक योजना, पूंजी निवेश और बिजनेस विस्तार पर पूरा अधिकार रखेगी। भारतीय बीमा बाज़ार में, जहाँ प्राइवेट और पब्लिक प्लेयर्स के बीच कड़ी टक्कर है, पूरी तरह से कंट्रोल मिलने से वैश्विक कंपनियों को अपनी लोकल ऑपरेशंस को ग्लोबल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म, रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम और प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रेटेजी के साथ बेहतर ढंग से जोड़ने का मौका मिलता है।
वित्तीय प्रदर्शन और रेगुलेटरी स्थिति
31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में, Aviva Life Insurance Company India ने ₹1,343 करोड़ का प्रीमियम इनकम दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 2.8% की मामूली बढ़ोतरी दिखाता है। कंपनी के नए बिजनेस प्रीमियम में 10% बढ़कर ₹351 करोड़ हो गए, लेकिन उसका नेट प्रॉफिट 21.7% घटकर ₹84.15 करोड़ रह गया। मार्च 2026 के अंत तक, कंपनी के पास लगभग ₹16,316 करोड़ की संपत्ति थी।
रेगुलेटरी की बात करें तो, कंपनी की सॉल्वेंसी रेशियो 188% रही, जो IRDAI द्वारा तय 150% के न्यूनतम स्तर से काफी ऊपर है। यह दर्शाता है कि कंपनी अपनी पॉलिसीधारकों की देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कैपिटल रखती है।
बाज़ार की चाल और भविष्य की उम्मीदें
भारत का लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर फिलहाल कड़ी प्रतिस्पर्धा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस कर रहा है। Aviva का 74% से 100% तक स्टेक बढ़ाना, बाज़ार के प्रति उसकी लंबी अवधि की प्रतिबद्धता को दिखाता है। हालांकि, कंपनी को विस्तार के लिए पूंजी खर्च करने और प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाने के बीच संतुलन बनाना होगा। अब देखना यह है कि Aviva अपनी नई आज़ादी का इस्तेमाल मार्केट शेयर बढ़ाने, खर्चों को कंट्रोल करने और भारतीय बीमा नियमों के अनुसार कैसे करती है।
