Avaada Group का बड़ा कदम: ₹6,200 करोड़ का लोन लेने की तैयारी, पुराने कर्ज को करेगी रीफाइनेंस

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AuthorNeha Patil|Published at:
Avaada Group का बड़ा कदम: ₹6,200 करोड़ का लोन लेने की तैयारी, पुराने कर्ज को करेगी रीफाइनेंस

Avaada Group के फाउंडर विनीत मित्तल देश की ग्रीन एनर्जी कंपनी के लिए **$750 मिलियन** (लगभग ₹6,200 करोड़) का नया लोन लेने की जुगत में हैं। यह पैसा मौजूदा **$1 बिलियन** (लगभग ₹8,300 करोड़) के क्रेडिट फैसिलिटी को रीफाइनेंस करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

क्या है Avaada Group की योजना?

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की एक बड़ी कंपनी Avaada Group, ग्लोबल लेंडर्स से करीब $750 मिलियन (लगभग ₹6,200 करोड़) का नया फाइनेंसिंग जुटाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पैसे का इस्तेमाल 2023 में Brookfield Renewable Partners द्वारा दिए गए $1 बिलियन (लगभग ₹8,300 करोड़) के क्रेडिट फैसिलिटी को रीफाइनेंस करने के लिए किया जाएगा। इस कर्ज को रीस्ट्रक्चर करके कंपनी अपनी बैलेंस शीट को और मजबूत करना चाहती है, ताकि वह देश भर में बड़े पैमाने पर सोलर, विंड और हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट्स का विकास जारी रख सके।

कैसे होगा फाइनेंस?

माना जा रहा है कि यह डील एक स्पेशल एंटिटी के ज़रिए की जाएगी, जिसमें Barclays Plc और DBS Bank अंडरराइटर के तौर पर काम करेंगे। इस प्लान में ऑफशोर लोन और रुपए में जारी किए गए बॉन्ड्स का मिश्रण शामिल हो सकता है, जिसकी रीपेमेंट अवधि लगभग 3 साल रहने की उम्मीद है। फिलहाल बातचीत जारी है और Standard Chartered Plc, Nomura Holdings Inc., और JPMorgan Chase & Co. जैसे कई ग्लोबल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस भी इस लेंडिंग सिंडिकेट में शामिल होने के लिए चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, अभी इंटरेस्ट रेट्स और फाइनल टर्म्स पर बातचीत चल रही है, लेकिन यह कदम कंपनी की क्षमता विस्तार (capacity expansion) के बीच अपने बॉरोइंग कॉस्ट को मैनेज करने के प्रयासों को दर्शाता है।

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का नज़रिया

भारत ने 2035 तक अपनी 60% पावर कैपेसिटी नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्स से हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए Avaada Group जैसी कंपनियों को रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में भारी पूंजी निवेश की ज़रूरत होगी। ग्लोबल लेंडर्स में ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए काफी दिलचस्पी है, क्योंकि क्लीन एनर्जी ग्लोबल लेवल पर इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए प्राथमिकता बन गई है। कंपनी के लिए, अपने ऑपरेशनल प्रोजेक्ट्स और नए रिन्यूएबल कैपेसिटी में निवेश के बीच संतुलन बनाते हुए कर्ज का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करना बहुत ज़रूरी है।

आगे का रास्ता और ग्रोथ

कर्ज के रीस्ट्रक्चरिंग के अलावा, Avaada Group अपने ग्रोथ के अगले चरण की भी योजना बना रहा है। कंपनी पहले भी अपनी सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, Avaada Electro, के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) को लॉन्च करने में रुचि दिखा चुकी है। इन्वेस्टर्स इन रीफाइनेंसिंग वार्ताओं के नतीजों पर बारीकी से नज़र रखेंगे, क्योंकि इसका फाइनल स्ट्रक्चर सीधे कंपनी के कैश फ्लो और इंटरेस्ट बर्डन को प्रभावित करेगा। आगे चलकर जिन मुख्य बातों पर ध्यान दिया जाएगा, उनमें फाइनल इंटरेस्ट रेट, नए कर्ज की अवधि और उसकी सोलर सब्सिडियरी की संभावित लिस्टिंग की टाइमलाइन पर कोई भी आधिकारिक घोषणा शामिल होगी।

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