ऑटो सेक्टर पर फोकस करने वाली NBFCs ने FY27 की पहली तिमाही में **₹1.04 लाख करोड़** का लोन बांटा, जो पिछले साल के मुकाबले **20.7%** ज्यादा है। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में इसमें **4.6%** की गिरावट आई है। यह नरमी पिछले क्वार्टर में कमर्शियल व्हीकल (CV) की प्री-बाइंग के कारण है। ऐसे में, NBFCs अब SME, गोल्ड और पर्सनल लोन जैसे दूसरे सेगमेंट में तेजी से उतर रही हैं ताकि ग्रोथ बनी रहे।
ऑटो NBFCs ने नए वित्त वर्ष की दमदार शुरुआत की है
ऑटो सेक्टर पर फोकस करने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) ने नए वित्त वर्ष (FY27) की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। इन कंपनियों ने ₹1.04 लाख करोड़ का लोन बांटा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20.7% की जबरदस्त बढ़ोतरी दिखाता है।
हालांकि, अगर पिछली तिमाही से तुलना करें तो लोन बांटने के आंकड़े में 4.6% की गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि यह नरमी कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में हुई प्री-बाइंग (पहले खरीद) की वजह से है। पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में कई कंपनियों ने भविष्य की मांग को देखते हुए ज्यादा खरीददारी कर ली थी, जिसकी वजह से इस तिमाही में थोड़ी सुस्ती देखी जा रही है।
व्हीकल लोन पर निर्भरता घटाने की रणनीति
इस तिमाही के नतीजों से एक बड़ी बात सामने आई है - कंपनियां अब सिर्फ कमर्शियल व्हीकल पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। जैसे-जैसे हैवी व्हीकल सेगमेंट में मांग के उतार-चढ़ाव आते हैं, वैसे-वैसे बड़ी NBFCs अब स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (SME) लोन, गोल्ड लोन और प्रॉपर्टी पर लोन जैसे दूसरे सेगमेंट में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
उदाहरण के लिए, Cholamandalam Investment and Finance Company का 40% से ज्यादा का पोर्टफोलियो अब नॉन-व्हीकल सेगमेंट से आता है। वहीं, Shriram Finance ने अपने नॉन-कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में 25% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की है। यह दिखाता है कि कंपनियां अपनी कमाई के जरियों को स्थिर करने के लिए रणनीतिक बदलाव कर रही हैं।
दमदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
गाड़ियों के सेगमेंट में तिमाही आधार पर थोड़ी कमी के बावजूद, इन NBFCs ने ऑपरेशनल एफिशिएंसी (परिचालन दक्षता) में दम दिखाया है। प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) में 35.7% का सालाना उछाल आकर ₹11,771 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 53.4% की भारी बढ़ोतरी के साथ यह लगभग ₹6,519 करोड़ हो गया।
एसेट क्वालिटी (संपत्ति की गुणवत्ता) कुल मिलाकर साल-दर-साल स्थिर बनी हुई है। हालांकि, कुछ कंपनियों ने मानसून के महीनों के दौरान स्टेज 2 और स्टेज 3 एसेट्स में थोड़ी बढ़ोतरी देखी है, जो कि एक आम बात है।
अलग-अलग कंपनियों के आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। Mahindra Finance के व्हीकल डिस्बर्समेंट में पिछली तिमाही के मुकाबले 24.9% की गिरावट आई, जबकि Cholamandalam और Shriram Finance में क्रमशः 14.7% और 13.8% की कमी देखी गई। वहीं, Sundaram Finance ने अपनी रिटेल डिवीजन के अच्छे प्रदर्शन की बदौलत पिछली तिमाही में कुल डिस्बर्समेंट में 11.1% की बढ़त दर्ज की।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
आगे चलकर, निवेशकों को यह देखना होगा कि ये NBFCs बढ़ती फंडिंग लागत और अनसिक्योर्ड (बिना गारंटी वाले) लोन सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कैसे करती हैं। SME और पर्सनल लोन सेगमेंट ग्रोथ में मदद तो कर रहे हैं, लेकिन इनमें जोखिम व्हीकल फाइनेंसिंग की तुलना में अलग हो सकता है। इन नए और विविध पोर्टफोलियो में एसेट क्वालिटी बनाए रखना FY27 में मुनाफे की मौजूदा रफ्तार को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स मैनेजमेंट की कमेंट्री पर भी नजर रखेंगे कि यील्ड प्रेशर (ब्याज दर का दबाव) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ट्रैक्टर और पैसेंजर व्हीकल की मांग पर क्या असर पड़ता है।
