Auto Finance में बड़ा बदलाव: अब कार खरीदें और लोन पाएं इंस्टेंट!

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Auto Finance में बड़ा बदलाव: अब कार खरीदें और लोन पाएं इंस्टेंट!

भारतीय ऑटो फाइनेंस कंपनियां अब 'एम्बेडेड फाइनेंस' को अपनाने पर ज़ोर दे रही हैं। इसका मतलब है कि कार खरीदने की प्रक्रिया के दौरान ही लोन की सुविधा को इंटीग्रेट किया जाएगा। इस बदलाव से ट्रांज़ैक्शन में लगने वाला समय कम होगा और डीलरशिप के लिए फंडिंग के नए तरीके खुलेंगे।

एम्बेडेड फाइनेंस: ऑटो फाइनेंसिंग का नया चेहरा

भारतीय ऑटोमोबाइल फाइनेंस सेक्टर में एक बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। कंपनियां अब 'एम्बेडेड फाइनेंस' की ओर बढ़ रही हैं, जो एक डिजिटल-फर्स्ट अप्रोच है। इसमें क्रेडिट सॉल्यूशंस को सीधे पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) पर ही जोड़ दिया जाएगा। मौजूदा प्रक्रिया में जहां डॉक्यूमेंटेशन और लोन अप्रूवल में देरी होती है, वहीं एम्बेडेड फाइनेंस से ग्राहक को कार खरीदते समय ही तुरंत लोन मिलने की उम्मीद है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल, जो अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित बाजारों में काफी पॉपुलर है, भारत में कार खरीदने के अनुभव को कहीं ज्यादा तेज़ और सुविधाजनक बना सकता है।

पारंपरिक लेंडिंग से आगे

फिलहाल भारत में ज़्यादातर ऑटो फाइनेंसिंग पारंपरिक ईएमआई (EMI) वाले लोन के ज़रिए होती है। वहीं, लीजिंग और सब्सक्रिप्शन जैसे विकल्प अभी भी बहुत छोटे स्तर पर हैं। लीजिंग का मार्केट शेयर सिर्फ़ 1.5% है, जबकि सब्सक्रिप्शन मॉडल का 0.1%। फाइनेंसियल कंपनियां इस गैप को एक बड़े ग्रोथ अवसर के रूप में देख रही हैं। प्लेटफॉर्म-आधारित मॉडल की ओर बढ़कर, लेंडर्स अपनी सेवाओं को सीधे ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) और डीलरशिप नेटवर्क के कस्टमर जर्नी में एम्बेड करने की योजना बना रहे हैं।

डीलरशिप ऑपरेशन्स को सपोर्ट

कई ऑटो डीलरशिप्स के लिए फाइनेंस और इंश्योरेंस (F&I) प्रोडक्ट्स से होने वाली कमाई उनके प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा होती है। इंडस्ट्री के हितधारक लेंडर्स से आग्रह कर रहे हैं कि वे सिर्फ़ सामान्य ईएमआई (EMI) के बजाय, लोकल और सेगमेंट-स्पेसिफिक स्कीम्स बनाएं। प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन्स देने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल डीलर्स को बिक्री तेज़ी से क्लोज करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, को-लेंडिंग (Co-lending) के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है, जिसमें बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs) मिलकर रिस्क शेयर करते हैं और क्रेडिट की पहुंच बढ़ाते हैं।

होलसेल और यूज्ड कार फाइनेंसिंग में चुनौतियां

रिटेल ट्रांज़ैक्शन के अलावा, फाइनेंसर्स होलसेल फंडिंग में भी गैप को एड्रेस कर रहे हैं। डीलर्स इन्वेंटरी फाइनेंसिंग में ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी और बैंकों से इंटरेस्ट रेट में बदलाव की तेज़ ट्रांसमिशन की मांग कर रहे हैं। एक और ज़रूरी क्षेत्र है यूज्ड व्हीकल मार्केट, जो भारत में अभी भी काफी हद तक अनऑर्गनाइज़्ड है। लेंडर्स पुरानी कारों के लिए ज़्यादा मजबूत फाइनेंसिंग फ्रेमवर्क बनाने के तरीके खोज रहे हैं, साथ ही इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट प्रोसेस में भी सुधार कर रहे हैं। जैसे-जैसे ये फाइनेंसर्स अपने सिस्टम को ऑटो रिटेल के साथ ज़्यादा बारीकी से इंटीग्रेट करने की कोशिश कर रहे हैं, इन प्रक्रियाओं को डिजिटाइज़ करते हुए क्रेडिट क्वालिटी बनाए रखना इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.