Aum Ventures ने अपना दूसरा इंडिया इनोवेशन फंड (India Innovation Fund II) लॉन्च किया है और पहले चरण में **₹225 करोड़** की राशि जुटाई है। इस फंड का कुल लक्ष्य **₹750 करोड़** है, जिसे AI, सेमीकंडक्टर और स्पेस जैसी उभरती हुई डीपटेक सेक्टर्स में निवेश किया जाएगा। खास बात यह है कि जुटाई गई रकम में **65%** से ज्यादा हिस्सेदारी अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की है, जो भारत के स्पेशलाइज्ड टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में बढ़ती ग्लोबल दिलचस्पी को दर्शाता है।
Aum Ventures का बड़ा ऐलान: ₹225 करोड़ जुटाए
Aum Ventures, जो SEBI से रजिस्टर्ड वेंचर कैपिटल फर्म है, ने अपने दूसरे फंड 'इंडिया इनोवेशन फंड II' (India Innovation Fund II) का पहला क्लोजर पूरा कर लिया है। फर्म ने इस फंड के लिए ₹225 करोड़ की पूंजी सुरक्षित की है। Aum Ventures का इरादा इस फंड के लिए कुल ₹750 करोड़ जुटाने का है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य शुरुआती चरण (early-stage) की डीपटेक कंपनियों को सपोर्ट करना है। डीपटेक का मतलब उन कंपनियों से है जो अनोखे, जटिल साइंटिफिक या इंजीनियरिंग इनोवेशन पर आधारित होती हैं, जिन्हें दोहराना मुश्किल होता है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर्स, स्पेस-टेक, रोबोटिक्स और डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
विदेशी निवेशकों का बढ़ा भरोसा
इस फंड रेजिंग में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की दिलचस्पी एक अहम बात है। पहले क्लोजर के लिए मिले शुरुआती निवेश में 65% से अधिक हिस्सा अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे देशों के ग्लोबल निवेशकों, फैमिली ऑफिस और स्ट्रेटेजिक प्लेयर्स का रहा। यह दिखाता है कि विदेशी पूंजी अब भारत की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च क्षमताओं में निवेश करने के लिए तेजी से आगे आ रही है।
पिछले फंड का शानदार रिटर्न
वेंचर कैपिटल (Venture Capital) स्पेस से वाकिफ निवेशकों के लिए, Aum Ventures के पहले फंड का प्रदर्शन जानना दिलचस्प हो सकता है। फर्म ने अपने पहले फंड के लिए 53% का ग्रॉस इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (Gross IRR) दर्ज किया था। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि वेंचर कैपिटल में निवेश स्वाभाविक रूप से हाई-रिस्क वाले होते हैं और रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। ऐसे फंड की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि वे जिन स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं, वे प्रोटोटाइप से आगे बढ़कर स्केलेबल और प्रॉफिटेबल बिजनेस बनने की क्षमता रखते हैं या नहीं।
डीपटेक में निवेश के जोखिम और रणनीति
डीपटेक कंपनियों में निवेश पारंपरिक सॉफ्टवेयर या कंज्यूमर बिजनेस की तुलना में अलग जोखिम रखता है। इन कंपनियों को अक्सर रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए लंबे समय, भारी शुरुआती पूंजी और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। फंड का लक्ष्य 25 से 30 कंपनियों में निवेश करके और बाद के फंडिंग राउंड्स (जैसे सीरीज A और सीरीज B) के लिए अतिरिक्त पूंजी आरक्षित करके इन जोखिमों को कम करना है। यह रणनीति फंड को स्टार्टअप्स के परिपक्व होने और उनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता साबित करने के साथ-साथ उनका समर्थन करने की अनुमति देती है।
आगे क्या?
यह फंड एक कैटेगरी II अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) के तौर पर स्ट्रक्चर्ड है, जो मुख्य रूप से उन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स के लिए है जो शुरुआती चरण के वेंचर कैपिटल से जुड़े इलिक्विडिटी (illiquidity) और हाई-रिस्क को झेल सकते हैं। इंडस्ट्री के लिए अगला अहम पड़ाव यह देखना होगा कि फर्म अपने ₹750 करोड़ के पूरे फंड-रेज़िंग लक्ष्य को पूरा कर पाती है या नहीं, और वह प्रतिस्पर्धी ग्लोबल माहौल में उच्च-गुणवत्ता वाली डीपटेक स्टार्टअप्स की पहचान और उन्हें स्केल करने में कितनी सफल होती है।
