Credit Card Spending: अगस्त में खर्च घटा **2.8%**, HDFC Bank ने दिखाई दमदारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Credit Card Spending: अगस्त में खर्च घटा **2.8%**, HDFC Bank ने दिखाई दमदारी

भारत में अगस्त के दौरान क्रेडिट कार्ड से होने वाले कुल खर्च में गिरावट देखी गई है, जो घटकर **₹2.02 ट्रिलियन** रह गया है। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में **7%** की भारी कमी इसका मुख्य कारण बनी है। हालांकि, जहां SBI Card और ICICI Bank का बिजनेस सुस्त रहा, वहीं HDFC Bank ने **1.83%** की बढ़त के साथ बाजार में मजबूती बनाए रखी है।

अगस्त के महीने में भारतीय बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाला कुल खर्च घटकर ₹2.02 ट्रिलियन पर आ गया है, जो जुलाई में ₹2.08 ट्रिलियन था। Reserve Bank of India (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस 2.8% की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ ऑनलाइन पेमेंट वॉल्यूम में आई 7% की कमी का है, जो कुल ₹1.23 ट्रिलियन रही। हालांकि ई-कॉमर्स खर्च में थोड़ी रिकवरी दिखी है, लेकिन डिजिटल ट्रांजेक्शन में आई यह सुस्ती कंज्यूमर खर्च के ठंडे पड़ने का संकेत है।

बैंकों का प्रदर्शन: कौन जीता, कौन हारा?

इस सुस्ती का असर सभी बैंकों पर एक जैसा नहीं रहा। मार्केट लीडर HDFC Bank ने इंडस्ट्री के ट्रेंड के उलट प्रदर्शन किया और 1.83% की बढ़त दर्ज की, जिससे उनका कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू ₹61,233 करोड़ तक पहुंच गया। इसके विपरीत, अन्य बड़े खिलाड़ियों के लिए यह महीना मुश्किल भरा रहा। SBI Card के खर्च में 10.8% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹35,313 करोड़ पर सिमट गया। वहीं, ICICI Bank और Axis Bank के खर्च में क्रमशः 4.9% और 4.7% की गिरावट दर्ज की गई।

ग्रोथ का पैराडॉक्स

दिलचस्प बात यह है कि खर्च भले ही कम हुआ हो, लेकिन बैंक लगातार अपना कार्ड बेस बढ़ा रहे हैं। अगस्त में कुल क्रेडिट कार्डों की संख्या जुलाई के 122.85 मिलियन से बढ़कर 124.05 मिलियन हो गई है। SBI Card ने सबसे ज्यादा 193,000 नए कार्ड जोड़े, जबकि HDFC Bank ने 122,669 नए कार्ड जारी किए।

निवेशकों के लिए चुनौती यह है कि नए ग्राहक तो जुड़ रहे हैं, लेकिन प्रति कार्ड खर्च कम हो रहा है। क्रेडिट कार्ड कंपनियां इंटरचेंज फीस से बड़ा रेवेन्यू कमाती हैं, इसलिए ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में कमी का सीधा असर इनकी कमाई पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

अब बाजार की नजरें आगामी फेस्टिव सीजन पर टिकी हैं। क्या त्योहारों की मांग अगस्त की इस सुस्ती को पीछे छोड़ पाएगी, यह देखना अहम होगा। इसके अलावा, निवेशकों को यह भी ट्रैक करना होगा कि क्या कम होता खर्च आने वाले समय में बैंकों के एसेट क्वालिटी के लिए कोई नई मुसीबत तो पैदा नहीं कर रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.