Augmont Enterprises का **₹825 करोड़** का IPO आज समाप्त हो गया। तमाम सवालों के बावजूद, इश्यू को **14 गुना** से ज्यादा का सब्सक्रिप्शन मिला है। ये सवाल प्रमोटर ग्रुप के रिश्तेदारों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई का खुलासा प्रॉस्पेक्टस में न किए जाने को लेकर उठाए गए हैं।
IPO को मिला दमदार सब्सक्रिप्शन
Augmont Enterprises का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 21 अगस्त को खुला था और 25 अगस्त, 2026 को बंद हो गया। अंतिम दिन तक, इस इश्यू को 14 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला, जो निवेशकों की जबरदस्त दिलचस्पी को दर्शाता है।
प्रमोटर ग्रुप पर उठे सवाल
हालांकि, इस IPO पर कुछ सवाल भी उठे हैं। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में राकेश कोठारी और पृथ्वीराज कोठारी, जो प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा हैं, उनके खिलाफ चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यवाही का जिक्र नहीं है। यह जानकारी प्रॉस्पेक्टस में न होने से पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
कंपनी का पक्ष
कंपनी के सूत्रों का कहना है कि उन्होंने SEBI के ICDR रेगुलेशन के अनुसार सभी जरूरी खुलासे किए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राकेश और पृथ्वीराज कोठारी का Augmont के रोजमर्रा के कामकाज में कोई कार्यकारी पद नहीं है। कंपनी का कहना है कि फाइलिंग में केवल वही जानकारी शामिल थी जो सीधे कंपनी, उसकी सहायक कंपनियों और निदेशकों से संबंधित है।
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
विवादों के बावजूद, Augmont का वित्तीय प्रदर्शन निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में, कंपनी की कुल आय 42% बढ़कर ₹94,282.47 लाख हो गई, जबकि नेट प्रॉफिट 53% बढ़कर ₹348.3 लाख रहा। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो बहुत कम 0.01 है, साथ ही रिटर्न ऑन इक्विटी 51.04% और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड 40.27% रहा है।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता इन खुलासों को लेकर नियामक जांच की संभावना है। IPO प्रक्रिया जारी है, लेकिन यह मामला प्रॉस्पेक्टस में गवर्नेंस और कानूनी फाइलों की जांच के महत्व की याद दिलाता है। यह देखना होगा कि कंपनी भविष्य में अपने कारोबार के साथ-साथ अपनी प्रतिष्ठा और अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियों को कैसे संभालती है।
