📉 कंपनी के नतीजे और ऑडिटर की चिंता
SPA Capital Services Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए मजबूत परफॉर्मेंस दर्ज की है। कंपनी के टोटल रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 35.95% की जोरदार बढ़ोतरी हुई, जो ₹8.22 करोड़ तक पहुंच गया (पिछले साल ₹6.05 करोड़ था)। वहीं, इस तिमाही में नेट प्रॉफिट में 53.68% का इजाफा देखा गया, जो ₹0.21 करोड़ रहा (पिछले साल ₹0.14 करोड़)। बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी 54.2% बढ़कर ₹0.680 हो गया, जो पिछले साल ₹0.441 था।
अगर नौ महीनों (9M FY26) के नतीजों पर नजर डालें, तो टोटल रेवेन्यू 46.14% बढ़कर ₹27.66 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹18.93 करोड़ था। हालांकि, इस अवधि में नेट प्रॉफिट में ग्रोथ थोड़ी धीमी रही, जो 3.94% बढ़कर ₹0.40 करोड़ हुआ (पिछले साल ₹0.38 करोड़)। नाइन मंथ्स के लिए बेसिक ईपीएस 3.87% बढ़कर ₹1.29 रहा।
ऑडिटर की रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ियां?
मगर, इन शानदार नंबर्स के पीछे एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर, M/s DHANA & Associates, की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में कुछ गंभीर बातों का जिक्र किया गया है। ऑडिटर ने पाया है कि कंपनी ने कुछ बकाया लोन पर कोई ब्याज नहीं लगाया है। तिमाही के लिए यह ब्याज ₹19.41 लाख और नौ महीनों के लिए ₹58.07 लाख है। ऑडिटर के मुताबिक, इससे एक्क्रूअल बेसिस ऑफ अकाउंटिंग से भटकाव हुआ है, जिसके कारण प्रॉफिट ज़्यादा दिखाया गया है और लोन की लायबिलिटी कम दिखाई गई है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि SPA Capital Services ने विभिन्न पार्टियों को ₹3.14 करोड़ के ऐसे लोन दिए हैं, जिन पर कोई ब्याज नहीं लिया गया है। NBFC गाइडलाइन्स के अनुसार, ऐसे एडवांसेज को 'लॉस एसेट्स' की कैटेगरी में रखा जाता है और इसके लिए प्रोविज़न बनाना ज़रूरी है। कंपनी ने ऐसा कोई प्रोविज़न नहीं बनाया है। ऑडिटर का कहना है कि इससे इस अवधि के लिए प्रॉफिट ₹3.14 करोड़ से ओवरस्टेट (ज़्यादा दिखाया गया) हुआ है, और लोन एसेट्स भी इसी राशि से ओवरस्टेट हुए हैं।
यह एक बड़ा विरोधाभास है कि इन महत्वपूर्ण अकाउंटिंग मुद्दों और स्टैंडर्ड प्रैक्टिस से हटने के बावजूद, ऑडिटर की रिपोर्ट का निष्कर्ष "नॉट मॉडिफाइड" (बिना बदलाव का) रहा। यह स्थिति कंपनी की असल फाइनेंशियल हेल्थ और रिपोर्टिंग की इंटीग्रिटी पर सवाल खड़े करती है।
निवेशकों के लिए रिस्क
ऑडिटर द्वारा उठाई गई अकाउंटिंग प्रैक्टिस की यह बात कंपनी के लिए बड़ा रिस्क पैदा करती है। अगर ये इश्यू रेगुलेटरी एक्शन का कारण बनते हैं या रेट्रोस्पेक्टिव एडजस्टमेंट की ज़रूरत पड़ती है, तो कंपनी के रिपोर्टेड फाइनेंशियल्स और निवेशकों के भरोसे पर गहरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, मैनेजमेंट की ओर से भविष्य के लिए कोई गाइडेंस न देना, भविष्य के प्रदर्शन या इन अकाउंटिंग चिंताओं को दूर करने की रणनीतियों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं देता है।
निवेशकों को इस मामले में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए और ऑडिट फाइंडिंग्स से संबंधित किसी भी और खुलासे या कार्रवाई पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। कंपनी का NBFC नियमों का पालन और उसके लोन पोर्टफोलियो की ट्रांसपेरेंसी प्रमुख क्षेत्र हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है।