Geetanjali Credit: ऑडिटर ने ₹256 लाख के लोन और ₹529 लाख के टैक्स पर उठाए सवाल, कंपनी को झटका

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AuthorAditya Rao|Published at:
Geetanjali Credit: ऑडिटर ने ₹256 लाख के लोन और ₹529 लाख के टैक्स पर उठाए सवाल, कंपनी को झटका
Overview

Geetanjali Credit and Capital Limited पर ऑडिटर की बड़ी चेतावनी सामने आई है। कंपनी के ऑडिटर, S K Bhavsar & Co., ने **₹256.27 लाख** के कन्फर्म न हुए लोन और एडवांसेज़, और **₹529.75 लाख** की इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की अनवेरिफाइड डिमांड पर पर्याप्त सबूत न मिलने की बात कही है। इन चिंताओं के बीच, कंपनी ने तिमाही में **₹Nil** रेवेन्यू और **₹1.59 लाख** का नेट लॉस दर्ज किया है।

📉 कंपनी के नंबर्स और ऑडिट में मिले झोल

Geetanjali Credit and Capital Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश किए हैं। इन नतीजों के साथ ऑडिटर S K Bhavsar & Co. की लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट में कई गंभीर चिंताएं (Red Flags) सामने आई हैं, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

तिमाही के आंकड़े (Quarterly Figures):
31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही में, कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू ₹Nil रहा। वहीं, कुल खर्चे ₹1.59 लाख रहे, जिसके चलते नेट लॉस ₹1.59 लाख दर्ज किया गया। पिछले साल की समान तिमाही (Q4 FY25) में ₹2.22 लाख के नेट लॉस की तुलना में यह घाटे को नियंत्रित करने में सुधार दिखाता है।

नौ महीनों के आंकड़े (Nine-Month Figures):
31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों की अवधि में, कंपनी ने ₹Nil रेवेन्यू पर ₹4.31 लाख का नेट लॉस दर्ज किया। यह पिछले साल की समान अवधि (31 दिसंबर, 2024 तक) के ₹3.44 लाख के नेट लॉस की तुलना में बढ़ा हुआ घाटा है।

तिमाही के लिए बेसिक अर्निंग्स (लॉस) पर शेयर (EPS) (₹0.04) रहा, और नौ महीनों के लिए यह (₹0.10) रहा।

❓ ऑडिटर के मुख्य सवाल

ऑडिटर की रिपोर्ट में ऐसे कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं जहाँ ऑडिटर को कंपनी के दावों की पुष्टि के लिए पर्याप्त और उचित सबूत नहीं मिले हैं। इससे फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा होता है:

  • लोन और एडवांसेज़ (Loans & Advances): कंपनी पर ₹256.27 लाख के लोन और एडवांसेज़ बकाया हैं, जिनकी बैलेंस कन्फर्मेशन (Balance Confirmations) नहीं मिली है। इनकी रिकवरी की संभावना अनिश्चित बनी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि मैनेजमेंट ने इन एडवांसेज़ पर कोई इंटरेस्ट इनकम रिकॉर्ड नहीं की है और न ही RBI के NPA (Non-Performing Asset) प्रोविजनिंग नियमों का पालन किया है।

  • इनकम टैक्स डिमांड (Income Tax Demand): इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से ₹529.75 लाख की एक बड़ी डिमांड बकाया है। कंपनी आवश्यक दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रही, जिससे ऑडिटर इसे वेरिफाई नहीं कर पाए। यह मामला लंबित कार्यवाही (Pending Proceedings) से जुड़ा है।

  • इन्वेस्टमेंट्स (Investments): ऑडिटर कंपनी के इन्वेस्टमेंट्स की सटीकता, उनके अस्तित्व (Existence) और भरोसेमंद वैल्यू (Reliable Value) को वेरिफाई करने में असमर्थ रहे। उन्हें केवल मैनेजमेंट के बयानों (Management Representations) और एक मैनेजमेंट लेटर पर निर्भर रहना पड़ा।

  • कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance): रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्ट की तारीख तक कंपनी के पास कोई कंपनी सेक्रेटरी मौजूद नहीं था, जो एक संभावित गवर्नेंस गैप (Governance Lapse) दर्शाता है।

⚠️ जोखिम और आगे का रास्ता

ऑडिटर की ओर से मुख्य संपत्तियों (Assets) और देनदारियों (Liabilities) को सत्यापित करने में असमर्थता, और लगातार रेवेन्यू की कमी को देखते हुए, कंपनी को गंभीर ऑपरेशनल और फाइनेंशियल जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। लोन की रिकवरी और इनकम टैक्स डिमांड का समाधान कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है। पर्याप्त ऑडिट एविडेंस की कमी कंपनी के आंतरिक नियंत्रण (Internal Controls) और पारदर्शिता (Transparency) पर भी सवाल उठाती है। इस रिपोर्ट में मैनेजमेंट की ओर से कोई भविष्य का आउटलुक (Outlook) या गाइडेंस नहीं दिया गया है।

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