Atom Group का दुबई में दबदबा! Amaltas Partners का किया अधिग्रहण

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AuthorAditya Rao|Published at:
Atom Group का दुबई में दबदबा! Amaltas Partners का किया अधिग्रहण

बेंगलुरु की Atom Group को दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी से Amaltas Partners Limited के अधिग्रहण की मंजूरी मिल गई है। यह स्ट्रेटेजिक कदम भारतीय हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और फैमिली ऑफिसेस को बॉर्डर पार वेल्थ मैनेज करने में मदद करेगा।

Atom Group का बड़ा दांव!

बेंगलुरु की फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म Atom Group अब दुबई के मार्केट में एंट्री करने के लिए तैयार है। कंपनी ने Amaltas Partners Limited का अधिग्रहण कर लिया है, जिसे हाल ही में दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) से मंजूरी मिली है। इस डील के बाद Atom Group दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) से अपना बिजनेस ऑपरेट कर सकेगी। यह कदम क्रॉस-बॉर्डर वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज की बढ़ती डिमांड को भुनाने के लिए उठाया गया है।

भारतीय HNIs के लिए नई राह

Atom Group इस नए प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारतीय हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और फैमिली ऑफिसेस को वेल्थ स्ट्रक्चरिंग, इन्वेस्टमेंट एडवाइजरी और रिस्क मैनेजमेंट जैसी कॉम्प्लेक्स सर्विसेज देने के लिए करेगी। DIFC में अपनी मौजूदगी से कंपनी का लक्ष्य खाड़ी और अन्य ग्लोबल मार्केट्स में कैपिटल और इन्वेस्टमेंट के बेहतर अवसर प्रदान करना है। यह उस इंडस्ट्री ट्रेंड के साथ मेल खाता है जहां भारतीय वेल्थ मैनेजमेंट फर्म्स अपने क्लाइंट्स को इंटरनेशनल लेवल पर एसेट्स डाइवर्सिफाई करने में मदद करने के लिए अपना विस्तार कर रही हैं।

लीडरशिप में बदलाव

इस इंटरनेशनल पुश को लीड करने के लिए Atom Group ने अपने पूर्व ग्लोबल चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (Multi-Family Office) नवीन रस्तोगी को Amaltas Partners का CEO और ग्रुप CIO नियुक्त किया है। यह नियुक्ति कंपनी की सर्विसेज में निरंतरता बनाए रखने और इंटरनेशनल ऑपरेशंस को बढ़ाने के इरादे को दर्शाती है। कंपनी अपनी मौजूदा इंडिया-बेस्ड ऑपरेशंस को सिंगापुर होल्डिंग स्ट्रक्चर और नई दुबई एंटिटी के साथ जोड़कर एक व्यापक एडवाइजरी फ्रेमवर्क बनाने की योजना बना रही है।

क्या हैं जोखिम?

यह विस्तार फाइनेंशियल फर्मों के ग्लोबल हब की ओर बढ़ने के ट्रेंड को दिखाता है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Atom Group अभी भी एक प्राइवेट, अनलिस्टेड कंपनी है। इसका मतलब है कि इसका कोई पब्लिक स्टॉक नहीं है और यह रिटेल इन्वेस्टर्स के साथ अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स, डेट या प्रॉफिटेबिलिटी की जानकारी शेयर नहीं करती है।

क्रॉस-बॉर्डर वेल्थ मैनेजमेंट में कई तरह के रिस्क शामिल होते हैं। ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स के जरिए किए गए इन्वेस्टमेंट घरेलू प्रोडक्ट्स की तुलना में अलग रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, टैक्स लॉ और करेंसी रूल्स के अधीन होते हैं। क्लाइंट्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे स्ट्रक्चर भारतीय रेगुलेटेड इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का विकल्प नहीं हैं। इस विस्तार की लॉन्ग-टर्म सक्सेस कंपनी की जटिल क्रॉस-बॉर्डर कंप्लायंस रिक्वायरमेंट्स को नेविगेट करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.