बैंकों ने बढ़ाई रफ्तार
इस स्कीम की ग्रोथ में बैंकों के आउटरीच और मजबूत एंगेजमेंट का बड़ा हाथ रहा। पब्लिक सेक्टर के बड़े बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) और यूको बैंक (UCO Bank) सबसे आगे रहे, इनके साथ ही इंडियन बैंक (Indian Bank) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) भी अहम रहे। प्राइवेट सेक्टर में IDBI बैंक ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। रीजनल रूरल बैंकों में भी शानदार कामयाबी देखी गई, जिसमें झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक (Jharkhand Rajya Gramin Bank) और त्रिपुरा ग्रामीण बैंक (Tripura Gramin Bank) सबसे आगे रहे।
युवाओं और महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
अधिकारियों ने बताया कि 18 से 25 साल के युवाओं के एनरोलमेंट में काफी इज़ाफ़ा हुआ है। यह दिखाता है कि युवा पीढ़ी अब लंबी अवधि की रिटायरमेंट प्लानिंग पर ज़्यादा ध्यान दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल एनरोलमेंट में महिलाओं की हिस्सेदारी 55.14% रही, जो सेमी-अर्बन और रूरल इलाकों से महिलाओं की लगातार भागीदारी को दर्शाता है।
विभिन्न चैनलों से बढ़ी पहुंच
स्मॉल फाइनेंस बैंकों जैसे AU स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) और उत्तजीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Ujjivan Small Finance Bank) ने भी इस विस्तार में योगदान दिया। सहकारी बैंकों जैसे श्री महिला सेवा सहकारी बैंक (Shri Mahila Sewa Sahakari Bank) और आंध्र प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (Andhra Pradesh State Co-operative Bank) ने भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की। झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटियों (SLBCs) ने अपने सबसे ऊंचे लक्ष्य हासिल किए, जबकि असम और मध्य प्रदेश का प्रदर्शन भी मजबूत रहा।
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) का मानना है कि स्कीम की लगातार सफलता का श्रेय बढ़े हुए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, आसान ऑनबोर्डिंग प्रोसेस और रिटायरमेंट सिक्योरिटी के बारे में बढ़ती जागरूकता को जाता है। भविष्य में ग्रोथ के लिए बैंकों, SLBCs और डाक विभाग के साथ लगातार सहयोग जारी रहेगा।
