Assam की Special Task Force ने एक बड़े फाइनेंशियल फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। गिरोह 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' (Mule Bank Accounts) के जरिए अवैध पैसा ट्रांसफर कर रहा था, जिसके तार विदेशी खुफिया तंत्र से जुड़े होने की आशंका है।
Assam Police की Special Task Force (STF) ने एक ऐसे शातिर गैंग का खुलासा किया है, जो देश के बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल काले धन को इधर-उधर करने के लिए कर रहा था। इस ऑपरेशन में 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग 'म्यूल अकाउंट्स' का इस्तेमाल कर रहे थे—यानी ऐसे बैंक खाते जो मासूम या मजबूर लोगों के नाम पर खोलकर पैसे की हेराफेरी के लिए उपयोग किए जाते थे। यह मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि Military Intelligence के इनपुट्स बताते हैं कि इसके तार विदेशी खुफिया एजेंसियों से जुड़े हो सकते हैं, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
मनी लॉन्ड्रिंग का बड़ा जाल
जांच में पता चला है कि यह गैंग हाई-फ्रीक्वेंसी और हाई-वॉल्यूम ट्रांजेक्शन करता था। ये लोग बड़ी रकम को बहुत कम समय के लिए अकाउंट में रखते थे और फिर उसे तुरंत ट्रांसफर कर देते थे, ताकि पैसे के सोर्स और उसके अंतिम ठिकाने का पता लगाना मुश्किल हो जाए। हालांकि छापेमारी गुवाहाटी में हुई है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यह गैंग पिछले 2 सालों से पूरे देश में एक बड़े नेटवर्क के साथ सक्रिय था।
जांच का दायरा बढ़ा
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्रीय एजेंसियां और Military Intelligence भी इसमें शामिल हो गई हैं। फिलहाल जब्त किए गए डिजिटल डिवाइसेज को डिक्रिप्ट किया जा रहा है ताकि इस मास्टरमाइंड नेटवर्क के पूरे स्ट्रक्चर का पता चल सके।
निवेशकों और बैंकिंग सिस्टम पर असर
यह घटना दिखाती है कि देश के बैंकिंग सेक्टर के सामने साइबर सुरक्षा और कंप्लायंस (Compliance) की चुनौतियां कितनी बड़ी हो गई हैं। ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर रेगुलेटर्स KYC नॉर्म्स और बैंकिंग नियमों को और भी ज्यादा सख्त कर देते हैं। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि भविष्य में बैंकों पर रेगुलेटरी स्क्रूटनी और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर बैंकिंग ऑपरेशंस की रफ्तार पर पड़ सकता है।
