AI के मुनाफे पर शक: एशिया फंड्स का डिफेंसिव स्टॉक्स की ओर झुकाव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
AI के मुनाफे पर शक: एशिया फंड्स का डिफेंसिव स्टॉक्स की ओर झुकाव

एशिया-पैसेफिक के फंड मैनेजर्स टेक्नोलॉजी शेयरों से पैसा निकालकर यूटिलिटीज़ और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर में लगा रहे हैं। BofA सिक्योरिटीज के सर्वे में खुलासा हुआ है कि अब निवेशक AI प्रोजेक्ट्स से कमाई का पक्का सबूत मांग रहे हैं, जिससे मार्केट सेंटिमेंट में बड़ा बदलाव आया है।

AI से कमाई पर निवेशकों का बढ़ता शक

एशिया-पैसेफिक के फंड मैनेजर्स अब टेक्नोलॉजी में अपने निवेश को लेकर और सतर्क हो गए हैं। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से असली मुनाफा मिलने के स्पष्ट संकेत मिलने का इंतजार कर रहे हैं और इसीलिए अपना पैसा सुरक्षित माने जाने वाले डिफेंसिव सेक्टरों में लगा रहे हैं। BofA सिक्योरिटीज के 203 पैनलिस्ट (जो कुल $581 बिलियन मैनेज करते हैं) के एक सर्वे के मुताबिक, AI सेक्टर में संभावित गिरावट के जोखिमों से बचाव करने वाले निवेशकों की संख्या जुलाई 2026 से दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।

कमाई के सबूत की मांग बढ़ी

इस बदलाव की मुख्य वजह AI टेक्नोलॉजी से तुरंत मिलने वाले वित्तीय रिटर्न की कमी है। सर्वे में शामिल लगभग दो-तिहाई निवेशकों का कहना है कि वे AI से संबंधित शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने से पहले, कमाई का ठोस सबूत चाहते हैं। हालांकि, टेक्नोलॉजी, खासकर सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर, अभी भी पसंदीदा सेक्टर बना हुआ है, लेकिन पहले जैसा अंधा विश्वास अब कम हो गया है। निवेशक अब इस बात का सबूत ढूंढ रहे हैं कि कंपनियां अपने AI निवेश को लगातार कैश फ्लो में बदल सकती हैं।

डिफेंसिव सेक्टरों में पैसा घूम रहा है

हाई-ग्रोथ वाले टेक और साइक्लिकल शेयरों से दूरी बनाने का ट्रेंड खासकर एशिया (जापान को छोड़कर) में साफ दिख रहा है। यहां के फंड मैनेजर्स उन सेक्टरों में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं, जो अनिश्चित आर्थिक समय में आमतौर पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं, जैसे कि यूटिलिटीज़, बैंक, कंज्यूमर स्टेपल्स, हेल्थकेयर और टेलीकॉम। यह कदम बताता है कि निवेशक टेक सेक्टर की ऊंची, लेकिन अनिश्चित विकास क्षमता की तुलना में स्थिरता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जापान में, बैंक और सेमीकंडक्टर पर फोकस बना हुआ है, हालांकि निवेशक सेंट्रल बैंक की पॉलिसी पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। लगभग 60% जवाबदाताओं को उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान सितंबर 2026 तक ब्याज दरें बढ़ाएगा, जिसका असर उधार लेने की लागत और मार्केट वैल्यूएशन पर पड़ सकता है। करेंसी की स्थिरता भी एक अहम पहलू है, और मार्केट पार्टिसिपेंट्स USD/JPY रेट 165 तक पहुंचने पर संभावित हस्तक्षेप पर कड़ी नजर रखेंगे।

निवेशक जोखिम और मार्केट पर असर

निवेशकों के लिए, यह बदलाव 'AI बबल' को लेकर व्यापक सतर्कता को उजागर करता है। लगभग 32% फंड मैनेजर्स ने AI से संबंधित चिंताओं को एक बड़ा मार्केट जोखिम बताया। जब ग्लोबल सेंटिमेंट टेक्नोलॉजी को लेकर सतर्क होता है, तो यह अक्सर एशियाई बाजारों में अस्थिरता पैदा करता है, जो ताइवान और कोरिया जैसे सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर निर्माण पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं।

हालांकि यह रोटेशन जरूरी नहीं कि निवेशक टेक को छोड़ रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह है कि वे बहुत चुनिंदा हो रहे हैं। भारतीय बाजार के लिए, यह ग्लोबल बदलाव प्रासंगिक है क्योंकि स्थानीय आईटी और विनिर्माण क्षेत्र अक्सर अंतरराष्ट्रीय फंड फ्लो को ट्रैक करते हैं। यदि वैश्विक निवेशक लाभप्रदता का सबूत मांगते रहते हैं, तो इन क्षेत्रों की कंपनियों को अपने AI खर्च और प्रोजेक्ट रिटर्न के संबंध में बढ़ी हुई जांच का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले महीनों में निवेशकों के लिए देखने वाली मुख्य बात प्रमुख टेक फर्मों की तिमाही आय रिपोर्ट होगी, क्योंकि ये वर्तमान मूल्यांकन अपेक्षाओं को सही ठहराने या कम करने के लिए आवश्यक डेटा प्रदान करेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.