Artha Bharat का बड़ा फैसला: टैक्स नियमों की अनिश्चितता के कारण GIFT City से अबू धाबी शिफ्ट किए दो फंड्स

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Artha Bharat का बड़ा फैसला: टैक्स नियमों की अनिश्चितता के कारण GIFT City से अबू धाबी शिफ्ट किए दो फंड्स

Artha Bharat Investment Managers ने अपने दो प्रमुख फंड्स को GIFT City से अबू धाबी के ADGM में शिफ्ट करने का फैसला किया है। कंपनी ने इसके पीछे भारत में टैक्स नियमों को लेकर बनी अनिश्चितता को मुख्य वजह बताया है।

टैक्स नियमों की उलझन

Artha Bharat Investment Managers ने अपने दो प्रमुख फंड्स, Artha Global Multiplier Fund और Artha Bharat Absolute Return Fund, को भारत के GIFT City से हटाकर अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) में स्थानांतरित कर दिया है। $800 मिलियन से अधिक की एसेट मैनेज करने वाली इस कंपनी ने संयुक्त अरब अमीरात में परिचालन के लिए लाइसेंस भी हासिल कर लिया है।

इस शिफ्ट के पीछे का सबसे बड़ा कारण टैक्स जटिलताएं हैं। GIFT City को एक इंटरनेशनल फाइनेंशियल हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है, लेकिन फंड मैनेजर्स अक्सर इसके टैक्स स्ट्रक्चर को लेकर उलझन में रहते हैं। खास तौर पर, Category III फंड्स के लिए मौजूदा डोमेस्टिक नियमों के तहत इंटरमीडिएट लेयर्स का टैक्स स्टेटस स्पष्ट नहीं है। कंपनी को डर था कि इससे सीधे निवेशकों के बजाय फंड पर ही टैक्स का बोझ पड़ सकता है, जो क्रॉस-बॉर्डर निवेश में बड़ी बाधा है।

अबू धाबी क्यों चुना?

अबू धाबी के ADGM में कंपनी अब 'Incorporated Cell Company' स्ट्रक्चर का उपयोग करेगी। यह ढांचा एक ही कानूनी दायरे में कई फंड्स को मैनेज करना आसान बनाता है, जैसा कि सिंगापुर जैसे वैश्विक हब में होता है। इससे मिडिल ईस्ट के सोवरेन वेल्थ फंड्स और फैमिली ऑफिस के लिए निवेश करना अधिक सहज हो जाएगा।

भारत में कामकाज जारी

हालांकि फंड्स बाहर शिफ्ट हुए हैं, लेकिन कंपनी ने भारत से अपना कारोबार समेटने के संकेत नहीं दिए हैं। Artha Bharat अपनी GIFT City की यूनिट के जरिए भारत में इनबाउंड फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) और अन्य थर्ड-पार्टी मैनेजमेंट सेवाएं देना जारी रखेगी। यह फैसला सिर्फ उन आउटबाउंड फंड्स तक सीमित है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेट करते हैं।

यह घटनाक्रम फाइनेंशियल हब्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। जहां भारत अपने IFSC को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, वहीं टैक्स फ्रेमवर्क और रेगुलेटरी क्लेरिटी आने वाले समय में निवेशकों को भारत में बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी साबित होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.