Artha Bharat Investment Managers ने GIFT City से अपने दो बड़े मास्टर फंड्स को अबू धाबी शिफ्ट करने का फैसला किया है। कंपनी ने इसके पीछे इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के जटिल टैक्स नियमों को वजह बताया है।
लगभग $800 मिलियन की एसेट मैनेज करने वाली कंपनी Artha Bharat Investment Managers ने अपने दो मास्टर फंड्स को गुजरात के GIFT City से निकालकर अबू धाबी ग्लोबल मार्केट ले जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला उन एसेट मैनेजर्स के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो भारत के फ्लैगशिप इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर में अपना कारोबार जमाए हुए हैं।
विवाद की जड़: इनकम-टैक्स एक्ट, 2025
इस पलायन के पीछे मुख्य वजह इनकम-टैक्स एक्ट के Schedule VI की व्याख्या है। मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी कैटेगरी III अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) को तभी टैक्स-एग्जेंप्ट स्टेटस मिलता है, जब उसके सभी यूनिट्स (स्पॉन्सर के अलावा) नॉन-रेसिडेंट्स के पास हों। दिक्कत तब आती है जब एक फंड दूसरे फंड में निवेश करता है। ऐसी स्थिति में, टैक्स का निर्धारण अंतिम निवेशक के बजाय तात्कालिक यूनिट-होल्डर के आधार पर होता है, जिससे मल्टी-लेयर्ड स्ट्रक्चर वाली कंपनियों पर भारी टैक्स का बोझ पड़ता है।
क्यों अबू धाबी बन रहा पसंद?
यह मामला इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) और डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू के बीच के तालमेल की कमी को दर्शाता है। एक ओर GIFT City को ग्लोबल कैपिटल के लिए एक सहज प्लेटफॉर्म बनाने का सपना देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर टैक्स विभाग के नियम इस राह में रुकावट बन रहे हैं। इसी प्रशासनिक अनिश्चितता के कारण अब फंड मैनेजर अबू धाबी जैसे स्पष्ट और सरल नियामक ढांचे वाले इलाकों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
अगर सरकार ने मल्टी-टीयर्ड फंड स्ट्रक्चर्स के लिए टैक्स नियमों में सुधार नहीं किए, तो यह भारत की ग्लोबल फाइनेंशियल हब बनने की महत्वाकांक्षाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर अब इस पर है कि क्या सरकार आने वाले समय में इनकम-टैक्स एक्ट में कोई संशोधन करती है ताकि ग्लोबल फंड मैनेजर्स के लिए भारत में काम करना आसान हो सके।
