मुनाफे की ओर लौटी Namra Finance
Arman Financial Services Limited ने अपनी माइक्रोफाइनेंस सब्सिडियरी, Namra Finance, के ज़रिए एक मज़बूत वापसी का संकेत दिया है। Namra Finance ने FY26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में ₹13 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) कमाया है। यह पिछले कुछ समय से हो रहे नुकसान के बाद एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
कंपनी के कुल फाइनेंशियल परफॉरमेंस में मज़बूती दिख रही है। Q3 FY26 में Consolidated disbursements में पिछली तिमाही के मुकाबले 30% का बड़ा उछाल आया है, जो कि ₹612 करोड़ तक पहुंच गया। कलेक्शन में सुधार और कड़े क्रेडिट स्क्रीनिंग प्रोसेस के कारण यह ग्रोथ संभव हुई है।
एसेट क्वालिटी और सब्सिडियरी का हाल
माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट, Namra Finance, की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में सुधार दिख रहा है। इसका ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेश्यो 3.4% रहा। रिस्क को कम करने के लिए, Namra Finance के 82% पोर्टफोलियो को क्रेडिट गारंटी फंड फॉर माइक्रो यूनिट्स (CGFMU) स्कीम के तहत कवर किया गया है। यह स्कीम डिफॉल्ट होने पर 75% तक की भरपाई करती है, जिससे भविष्य की प्रोविजनिंग की ज़रूरतें कम होती हैं। हालांकि, इसके लिए प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है, जो मौजूदा ऑपरेटिंग एक्सपेंस (Opex) को बढ़ाता है।
पूरी कंपनी के फाइनेंशियल की बात करें तो, Q3 FY26 में ग्रॉस टोटल इनकम (Gross Total Income) ₹160.1 करोड़ रही। तिमाही के लिए PAT ₹22.18 करोड़ था, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹7.26 करोड़ के नेट लॉस (Net Loss) की तुलना में एक बड़ा सुधार है। यह MFI के टर्नअराउंड और अन्य बिज़नेस सेगमेंट के सकारात्मक असर को दिखाता है। कंपनी के नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में Q3 FY26 में 0.5% की मामूली गिरावट आई और यह ₹90.91 करोड़ रही। वहीं, प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) में 20.8% की गिरावट दर्ज की गई, जो ₹54.72 करोड़ रहा। यह PAT ग्रोथ के बावजूद ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी पर कुछ दबाव का संकेत देता है।
बढ़ता ऑपरेटिंग एक्सपेंस और जोखिम प्रबंधन
ऑपरेटिंग एक्सपेंस (Opex) में बढ़ोतरी एक अहम चिंता का विषय है। मैनेजमेंट ने बताया कि FY26 के पहले नौ महीनों में ऑपरेटिंग कॉस्ट ₹40 करोड़ बढ़ी है। इसमें CGFMU स्कीम के लिए प्रीमियम भुगतान (जिस पर ₹7 करोड़ खर्च हुए) और क्रेडिट व रिकवरी ऑफिसर (BCM) स्ट्रक्चर का विस्तार शामिल है। जैसे-जैसे कंपनी अपने बिज़नेस को बढ़ा रही है, Opex में यह बढ़ोतरी मुनाफे के लिए एक बड़ा फैक्टर है जिस पर नज़र रखनी होगी।
कंपनी अपने माइक्रो-लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (Micro-LAP) पोर्टफोलियो को भी बढ़ा रही है, जो लगभग ₹90 करोड़ का हो गया है और इसमें 30 bps (Basis Points) से भी कम NPAs हैं। यह पोर्टफोलियो मुख्य रूप से गुजरात में है, और अब उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में भी इसका विस्तार करने की योजना है।
जोखिम और भविष्य की राह
मुख्य जोखिम:
- उधारकर्ताओं के कैश फ्लो में कमी: मैनेजमेंट का कहना है कि भले ही रीपेमेंट (Repayment) में सुधार हुआ है, लेकिन 'ज़मीन पर उधारकर्ताओं के कैश फ्लो अभी भी कमज़ोर हैं'। यह ग्राहकों के बीच अंतर्निहित आर्थिक दबाव का संकेत देता है।
- आय प्रमाण में चुनौतियां: कुछ सेगमेंट में, औपचारिक आय प्रमाण प्राप्त करना मुश्किल है। ऐसे में फील्ड स्टाफ के 'अनुमानों' पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे अंडरराइटिंग (Underwriting) की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
- बढ़ता ऑपरेटिंग एक्सपेंस: CGFMU प्रीमियम और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के कारण Opex में बढ़ोतरी प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना रही है।
भविष्य की योजना:
आगे देखते हुए, Arman Financial Services ने FY27 के लिए कम से कम 25% की ग्रोथ का लक्ष्य रखा है। मैनेजमेंट 4.5x के डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) से सहज है और इसे और कम करके 3x-3.5x तक लाने का लक्ष्य है। Consolidated Opex रेश्यो को कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 4.5% से 5% के बीच बनाए रखने का दीर्घकालिक लक्ष्य है। कंपनी ने फंड जुटाने के लिए नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के ज़रिए ₹500 करोड़ तक जुटाने की मंज़ूरी दी है और इसी तिमाही में ₹522 करोड़ का डेट जुटाया भी है।
सेक्टर का हाल:
Arman Financial Services, कॉम्पिटिटिव NBFC और माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में काम करती है। CreditAccess Grameen और Bandhan Bank जैसे प्रमुख खिलाड़ी भी माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री में पोस्ट-स्ट्रेस माहौल से जूझ रहे हैं। FY25 में बढ़ती Delinquencies के कारण माइक्रोफाइनेंस सेक्टर को चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन FY26 में एसेट क्वालिटी और प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार के साथ रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। कई NBFCs ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए डिजिटलाइजेशन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिसे Arman Financial भी अपना रही है। अब 75-80% इंडिविजुअल लोन कलेक्शन UPI या NACH मैंडेट्स के ज़रिए कैशलेस हो रहे हैं। हालांकि, सेक्टर की रिकवरी अभी भी ग्रामीण आय में लगातार सुधार और सतर्क जोखिम प्रबंधन पर निर्भर है, ऐसे क्षेत्रों में Arman ने उधारकर्ताओं के कमजोर कैश फ्लो को लेकर चिंता जताई है।