Apple Pay का भारत में धमाकेदार एंट्री प्लान! UPI नहीं, इस सर्विस पर रहेगा बड़ा दांव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Apple Pay का भारत में धमाकेदार एंट्री प्लान! UPI नहीं, इस सर्विस पर रहेगा बड़ा दांव

Apple अपने कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सर्विस को अक्टूबर 2026 तक भारत में लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का फोकस UPI के बजाय क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर है, जिसके लिए HDFC, ICICI और Axis बैंक के साथ बातचीत चल रही है।

क्रेडिट कार्ड पर क्यों है फोकस?

भारत के डिजिटल पेमेंट मार्केट में UPI का दबदबा है, लेकिन Apple की रणनीति कुछ अलग है। UPI ट्रांजैक्शन फिलहाल मर्चेंट्स के लिए फ्री हैं, जिससे कोई कमाई नहीं होती। इसके उलट, क्रेडिट कार्ड के जरिए Apple 'इंटरचेंज फीस' (Interchange Fees) से रेवेन्यू जनरेट करना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी प्रति ट्रांजैक्शन 15 से 20 बेसिस पॉइंट्स की हिस्सेदारी की मांग कर रही है, जिसे लेकर HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank के साथ बातचीत चल रही है।

बैंकिंग सेक्टर पर क्या होगा असर?

बैंकों के लिए यह स्थिति थोड़ी पेचीदा है। Apple जैसे प्रीमियम ब्रांड के साथ जुड़ने से ट्रांजैक्शन वॉल्यूम तो बढ़ेगा, लेकिन बैंकों को अपनी इंटरचेंज फीस का एक हिस्सा Apple के साथ शेयर करना होगा। अगर बैंक इस पर राजी होते हैं, तो उनके क्रेडिट कार्ड बिजनेस के प्रॉफिट मार्जिन पर थोड़ा दबाव बन सकता है। इन्वेस्टर्स की नजर इस बात पर है कि अंत में फीस स्ट्रक्चर क्या फाइनल होता है।

UPI से टक्कर नहीं, NFC इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती

Apple Pay का सीधा मुकाबला PhonePe या Google Pay जैसे प्लेयर्स से नहीं होगा क्योंकि कंपनी QR कोड के बजाय NFC-आधारित 'टैप-टू-पे' (Tap-to-pay) फीचर पर निर्भर है। भारत में अभी NFC वाले पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) टर्मिनल मुख्य रूप से बड़े शहरों और प्रीमियम स्टोर्स में ही उपलब्ध हैं, जो इसके विस्तार की एक बड़ी सीमा हो सकती है।

फिलहाल, Apple को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के कड़े सुरक्षा मानकों और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन नियमों का पालन करना होगा, जिसके बाद ही भारत में इस सर्विस को हरी झंडी मिलेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.