K Annamalai ने वित्त मंत्रालय से UPI ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित **0.4%** शुल्क के फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि **₹2,000** से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर यह शुल्क छोटे खुदरा विक्रेताओं पर बुरा असर डाल सकता है।
पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष K Annamalai ने प्रस्तावित UPI शुल्क को लेकर चिंता जताई है। उडुपी में एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा कि ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने का फैसला छोटे दुकानदारों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। सरकार का उद्देश्य इससे लगभग ₹15,000 करोड़ का राजस्व जुटाना है, लेकिन Annamalai का मानना है कि डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए इसे फ्री ही रखना चाहिए।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
अभी तक UPI का मॉडल पूरी तरह से फ्री रहा है, जिससे इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कुल ट्रांजेक्शन का 96% हिस्सा पहले की तरह फ्री ही रहेगा, सिर्फ 4% बड़े मर्चेंट पेमेंट्स पर ही यह नया लेवी (Levy) लगेगा। Annamalai का तर्क है कि सरकार को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक पब्लिक यूटिलिटी के तौर पर देखना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
यह बहस फिनटेक इंडस्ट्री के लिए काफी सेंसिटिव है। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल पेमेंट कंपनियों ने इसी 'जीरो-कॉस्ट' माहौल के जरिए अपना मर्चेंट बेस तैयार किया है। अगर यह शुल्क लागू होता है, तो इससे व्यापारियों का सेंटीमेंट और ट्रांजेक्शन वॉल्यूम प्रभावित हो सकता है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और सरकार अब इस पूरे फ्रेमवर्क पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस पॉलिसी का असर UPI की ग्रोथ और इन कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल पर क्या पड़ता है।
