RCOM फ्रॉड केस: अनिल अंबानी पर CBI का शिकंजा, **₹2,929 करोड़** बैंक फ्रॉड की जांच तेज, Insolvency और गहरायी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RCOM फ्रॉड केस: अनिल अंबानी पर CBI का शिकंजा, **₹2,929 करोड़** बैंक फ्रॉड की जांच तेज, Insolvency और गहरायी
Overview

Reliance Communications (RCOM) के **₹2,929 करोड़** के कथित बैंक फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी दूसरे दिन CBI की पूछताछ का सामना कर रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा शुरू की गई लोन के फंड डायवर्जन (fund diversion) और दुरुपयोग की जांच से RCOM की पहले से ही खराब इन्सॉल्वेंसी (insolvency) की प्रक्रिया और मुश्किल में पड़ गई है। **₹40,000 करोड़** से अधिक के कर्ज और स्पेक्ट्रम (spectrum) बिक्री पर कानूनी बाधाओं जैसी मुश्किलों के बीच, ग्रुप (group) स्तर पर चल रही रेगुलेटरी (regulatory) जांचों के बीच RCOM के रिकवरी (recovery) की उम्मीदें और धूमिल हो गई हैं।

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CBI मुख्यालय में अनिल अंबानी से पूछताछ जारी

नई दिल्ली: अनिल अंबानी शुक्रवार, 20 मार्च, 2026 को लगातार दूसरे दिन सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) मुख्यालय में सवालों के घेरे में रहे। Reliance Communications Ltd (RCOM) और ₹2,929.05 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड की जांच तेज हो गई है। यह पूछताछ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक शिकायत के बाद शुरू हुई है, जिसमें लोन के फंड (fund) के कथित डायवर्जन (diversion) और दुरुपयोग का आरोप है। इस मामले ने टेलिकॉम फर्म की वित्तीय मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

लोन के दुरुपयोग का बड़ा आरोप

एक फॉरेंसिक ऑडिट (forensic audit) के बाद शुरू हुए इस क्रिमिनल केस (criminal case) में आरोप है कि 2013 से 2017 के बीच जटिल इंटर-कंपनी ट्रांजैक्शन (inter-company transactions) के जरिए लोन के फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया। इससे SBI को ₹2,929.05 करोड़ का नुकसान हुआ। यह उस समय पब्लिक सेक्टर बैंकों (public sector banks) के एक कंसोर्टियम (consortium) के कुल ₹19,694.33 करोड़ के एक्सपोजर (exposure) का हिस्सा था। यह जांच उस दौर में RCOM की वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में CBI की व्यापक जांच का एक हिस्सा है।

RCOM का गहराता वित्तीय संकट

Reliance Communications जून 2019 से इन्सॉल्वेंसी (insolvency) की प्रक्रिया से गुजर रही है और करीब ₹40,000 करोड़ के कर्ज के बोझ तले दबी है। 19 मार्च, 2026 तक, इसकी मार्केट कैप (market cap) लगभग ₹238 करोड़ थी, और इसका शेयर (share) मामूली स्तर पर ट्रेड कर रहा था। कथित फ्रॉड (fraud) के दावों ने जटिल रिजॉल्यूशन प्रोसेस (resolution process) पर एक और बड़ा बोझ डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक फैसले ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (Insolvency and Bankruptcy Code) के तहत RCOM की स्पेक्ट्रम (spectrum) एसेट्स (assets) की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे क्रेडिटरों (creditors) की रिकवरी (recovery) की संभावनाओं पर असर पड़ रहा है। SBI ने पहले जून 2025 में RCOM के लोन खातों को फ्रॉड (fraud) के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने बरकरार रखा था, हालांकि इसमें प्रोसीजरल (procedural) चिंताएं भी उठाई गई थीं।

ग्रुप (Group) की कंपनियों पर भी व्यापक जांच

RCOM की कथित अनियमितताओं को लेकर CBI की जांच का दायरा बढ़ रहा है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) सहित कई बैंकों से नई शिकायतें मिली हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) और अन्य संस्थानों की शिकायतों के आधार पर भी मामले दर्ज किए गए हैं, जो कथित वित्तीय कदाचार के व्यापक पैटर्न का संकेत देते हैं। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) भी सक्रिय रूप से जांच कर रहा है, जिसने बैंक फ्रॉड (bank fraud) के संबंध में Reliance Group की विभिन्न संस्थाओं से जुड़ी ₹15,729 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच (attach) की हैं। अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने सभी एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने की बात कही है। हालांकि, इस लगातार चल रही जांच में उनके बेटे जय(Jai) अनमोल अंबानी (Anmol Ambani) भी अलग आरोपों में शामिल रहे हैं, जिससे समूह (group) के कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) और पिछली वित्तीय प्रबंधन (financial management) पर चिंताएं बढ़ रही हैं।

टेलीकॉम सेक्टर (Telecom Sector) में बूम, RCOM संघर्षरत

दूसरी ओर, भारतीय टेलीकॉम सेक्टर (telecom sector) तेजी से बदल रहा है, जिसमें 5G डिप्लॉयमेंट (5G deployment) और मोबाइल डेटा यूज़ (mobile data use) बढ़ रहा है। बाजार वैल्यू (market value) के 2025 में अनुमानित USD 37.79 बिलियन से बढ़कर 2034 तक 7.48% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से USD 72.32 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। जियो (Jio) और भारती एयरटेल (Bharti Airtel) जैसे प्रमुख ऑपरेटर्स (operators) इस विस्तार का नेतृत्व कर रहे हैं, जो सिर्फ कनेक्टिविटी (connectivity) से आगे बढ़कर सर्विस-लेड इकोसिस्टम (service-led ecosystems) और AI प्लेटफॉर्म्स (AI Platforms) की ओर बढ़ रहे हैं। इसके विपरीत, RCOM इन्सॉल्वेंसी (insolvency) में फंसा हुआ है, अपने पिछले एग्रेसिव (aggressive) विस्तार, बढ़े हुए कर्ज और नए प्लेयर्स (players) के साथ प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थता से जूझ रहा है। जबकि सेक्टर (sector) इनोवेशन (innovation) कर रहा है, RCOM की ऑपरेशनल क्षमता (operational capacity) और रिकवरी (recovery) की संभावनाएं इसकी जारी कानूनी लड़ाइयों और वित्तीय समस्याओं से गंभीर रूप से सीमित हैं। फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) 2026 की तीसरी तिमाही के नतीजे ₹63 करोड़ के रेवेन्यू (revenue) पर ₹2,767 करोड़ का नेट लॉस (net loss) दिखा रहे हैं।

फ्रॉड (Fraud) के आरोप RCOM की कमजोरी को और बढ़ाते हैं

RCOM की मूल समस्या इसकी गहरी जड़ें जमा चुकी कमजोरी है, जो बढ़ते फ्रॉड (fraud) के आरोपों से और बढ़ गई है। SBI के ₹2,929 करोड़ के दावे से RCOM की मौजूदा संरचनात्मक कमजोरियां और उजागर हुई हैं। कंपनी पहले से ही क्रेडिटर (creditor) के दावों के एक जटिल जाल का सामना कर रही है, जिसमें कई लेंडर्स (lenders) ने RCOM के खातों को फ्रॉड (fraud) के रूप में वर्गीकृत किया है। उदाहरण के लिए, केनरा बैंक (Canara Bank) ने RCOM और उसकी सब्सिडियरी (subsidiary) रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (Reliance Telecom Limited) के लिए क्रेडिट फैसिलिटी (credit facility) को फ्रॉड (fraud) के रूप में चिह्नित किया था, जिसके लिए ऑडिट (audit) में फंड (fund) डायवर्जन (diversion) पाए जाने के बाद RBI के सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री (Central Fraud Registry) में रिपोर्ट करना पड़ा। RCOM का इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन (insolvency resolution) प्रमुख न्यायिक फैसलों से गंभीर रूप से बाधित है, जैसे कि स्पेक्ट्रम (spectrum) की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला, जो क्रेडिटरों (creditors) के लिए संपत्ति रिकवर (recover) करने के विकल्पों को सीमित करता है। इसके अलावा, ग्रुप (group) की संस्थाओं में CBI और ED द्वारा जारी जांच कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) और वित्तीय अखंडता (financial integrity) के बारे में चिंताएं बढ़ा रही है, जिससे निवेशकों (investors) और क्रेडिटरों (creditors) का विश्वास कम हो रहा है। RCOM की भारी देनदारियों (liabilities) को सुलझाना इन बढ़ते कानूनी और वित्तीय जोखिमों (financial risks) के कारण चुनौतियों से भरा हुआ है।

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