मार्केट एनालिस्ट्स ने FY27 के लिए क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **15%** कर दिया है। जून तिमाही में **20%** की शानदार उछाल के बाद यह भरोसा बढ़ा है, लेकिन बैंकों का बढ़ता Loan-to-Deposit Ratio (LDR) और क्रेडिट कॉस्ट मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
भारत के बैंकिंग सेक्टर को लेकर एनालिस्ट्स का नजरिया बदल गया है। India Ratings and Research जैसी रेटिंग एजेंसियों ने अब FY27 के लिए क्रेडिट ग्रोथ का प्रोजेक्शन बढ़ाकर 15% कर दिया है, जो पहले 13% के आसपास था। इसकी मुख्य वजह जून 2026 तिमाही में दर्ज की गई 20% की जोरदार ग्रोथ है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा है।
इस उछाल के पीछे कॉर्पोरेट क्लाइंट्स, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) की लोन डिमांड का बड़ा हाथ है।
फंडिंग की समस्या (The Funding Bottleneck)
लोन बुक तो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बैंकों के सामने फंडिंग का संकट गहरा रहा है। सिस्टम-वाइड लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो (LDR) इस समय 85% के स्तर पर है, जो पिछले एक दशक का उच्चतम स्तर है। इसका मतलब है कि बैंकों के पास जमा राशि (Deposits) की तुलना में लोन देने की रफ्तार कहीं ज्यादा तेज है। जमा राशि जुटाने के लिए बैंकों को अब ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है, जिससे उनकी फंडिंग कॉस्ट बढ़ रही है। इसका सीधा असर नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दिख रहा है।
बढ़ती क्रेडिट कॉस्ट का डर
निवेशकों को अब बैड लोन की चिंता भी सता रही है। उम्मीद है कि FY27 में क्रेडिट कॉस्ट 74 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ सकती है, जो FY26 में 65 बेसिस पॉइंट्स थी। बैंकों को संभावित नुकसान की भरपाई के लिए ज्यादा प्रोविजनिंग करनी पड़ रही है।
साथ ही, Reserve Bank of India (RBI) ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, जिससे फंडिंग कॉस्ट कम होने की उम्मीद फिलहाल खत्म हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि साल की दूसरी छमाही में 'बेस इफेक्ट' के कारण क्रेडिट ग्रोथ में थोड़ी नरमी आ सकती है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि कौन से बैंक जमा राशि जुटाने और मार्जिन को प्रोटेक्ट करने में सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
