केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि छोटे, बिना गारंटी वाले लोन की रिकवरी दर बेहद अच्छी है। उन्होंने अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां सिर्फ **0.22%** ही डिफॉल्ट रेट है। मुंबई में 'सहकार नव-क्रांति' कार्यक्रम में उन्होंने अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (UCBs) के लिए नई कोर बैंकिंग सिस्टम भी लॉन्च की, जिससे डिजिटल अपनाने और संचालन को मानकीकृत करने में मदद मिलेगी।
छोटे कर्जदार, बड़ी भरोसेमंद'
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने छोटे कर्जदारों की विश्वसनीयता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि छोटे लोगों को दिए गए क्रेडिट में डिफॉल्ट का जोखिम कम होता है। मुंबई में 'सहकार नव-क्रांति' कार्यक्रम के दौरान, मंत्री ने अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक के आंकड़े पेश किए। मंत्री के अनुसार, बैंक की ₹5 लाख तक की कोलेटरल-फ्री लोन स्कीम में डिफॉल्ट रेट बेहद कम, यानी सिर्फ 0.22% रहा है। शाह ने इस आंकड़े का इस्तेमाल यह तर्क देने के लिए किया कि छोटे कर्जदार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हैं।
को-ऑपरेटिव बैंकिंग में डिजिटल क्रांति
यह बयान मुंबई में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NUCFDC) के ऑफिस के उद्घाटन के मौके पर दिया गया। सरकार सहकारिता क्षेत्र के अहम ऑपरेशंस को दिल्ली से मुंबई शिफ्ट कर रही है ताकि इस क्षेत्र के मजबूत नेटवर्क के करीब रह सके। इस पहल का एक बड़ा हिस्सा 'सहकार CBS' का लॉन्च है, जो अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों (UCBs) के लिए एक कॉमन कोर बैंकिंग सिस्टम है। यह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर 'बैंक इन ए बॉक्स' सॉल्यूशन की तरह काम करेगा, जो UCBs को आधुनिक टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी टूल्स और स्टैंडर्डाइज्ड ऑपरेशनल फ्रेमवर्क प्रदान करेगा।
गवर्नेंस और पारदर्शिता पर फोकस
इस पहल का मुख्य लक्ष्य को-ऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर को प्रोफेशनल बनाना है। पारंपरिक तौर पर को-ऑपरेटिव बैंक स्थानीय संस्थाएं रही हैं, लेकिन उनमें गवर्नेंस, पारदर्शिता और राजनीतिक प्रभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सहित रेगुलेटरी बॉडीज ने हमेशा बेहतर ऑडिट और मजबूत आंतरिक नियंत्रणों की आवश्यकता पर जोर दिया है। केंद्रीकृत कोर बैंकिंग सिस्टम की ओर यह कदम इन कमजोरियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे सभी सदस्य बैंक एक समान डिजिटल मानकों का पालन करेंगे।
भविष्य की राह: तेज़ अडॉप्शन की ज़रूरत
निवेशकों और वित्तीय क्षेत्र के जानकारों के लिए, इस पहल की सफलता इसके अपनाने की गति पर निर्भर करती है। सरकार ने सभी 1,400 UCBs को NUCFDC का सदस्य बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। वर्तमान में, लगभग 690 UCBs इस कॉर्पोरेशन से जुड़ी हैं, जिसे मार्च 2024 में स्थापित किया गया था। इन बैंकों के डिजिटलीकरण का उद्देश्य इस क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी और स्थिर बनाना है। हालांकि, ऑपरेशनल सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये छोटे बैंक कितनी प्रभावी ढंग से नई तकनीक को अपनाते हैं और क्या मानकीकरण से सहकारी संरचनाओं से जुड़े ऐतिहासिक गवर्नेंस जोखिम कम होते हैं। आने वाले महीनों में एक अहम बात यह होगी कि राज्य संघों की गति क्या रहती है ताकि मंत्रालय द्वारा निर्धारित 100% लक्ष्य को पूरा किया जा सके।
