Aditya Birla Renewables, Shell Plc की भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी असेट्स को **$1.8 अरब** में खरीदने के लिए MUFG से **$1.5 अरब** का लोन फाइनल करने जा रही है। इस डील से कंपनी की ग्रीन एनर्जी क्षमता **5 गीगावाट** तक बढ़ जाएगी।
1.8 अरब डॉलर की डील के लिए 1.5 अरब डॉलर का फाइनेंसिंग पैकेज
Aditya Birla Renewables, Shell Plc के भारत स्थित रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो को करीब $1.8 अरब में खरीदने के बेहद करीब पहुंच गई है। इस विस्तार के लिए कंपनी ने Mitsubishi UFJ Financial Group (MUFG) से $1.5 अरब का फाइनेंसिंग पैकेज हासिल कर लिया है। यह लोन एक्सटर्नल कमर्शियल बोर्रोइंग (ECB) के तौर पर पांच साल की मैच्योरिटी पीरियड के साथ स्ट्रक्चर किया गया है।
यह फाइनेंसिंग सिक्योरड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट (SOFR) से लगभग 160 बेसिस पॉइंट्स ऊपर है। इस रेट में बैंक का मार्जिन और जुड़े हुए सभी शुल्क शामिल हैं। फिलहाल MUFG इस फैसिलिटी के लिए एकमात्र अंडरराइटर है, लेकिन शुरुआती फेज के बाद इसे सिंडिकेशन प्रोसेस के जरिए अन्य लेंडर्स के साथ साझा करने की योजना है।
पोर्टफोलियो विस्तार का असर
इस अधिग्रहण के जरिए, Aditya Birla Renewables, Solenergi Power Pvt. Ltd. की 100% हिस्सेदारी खरीदकर 5 गीगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो को अपने नियंत्रण में ले लेगी। यह ट्रांजेक्शन पैरेंट कंपनी Grasim Industries Ltd. और ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स से मिले डेट (Debt) और इक्विटी (Equity) सपोर्ट से समर्थित है। शेयरधारकों के लिए, यह कदम भारतीय बाजार में कंपनी के ग्रीन एनर्जी फुटप्रिंट को बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रतिनिधित्व करता है।
फाइनेंसियल और स्ट्रेटेजिक कॉन्टेक्स्ट
यह डील ऐसे समय में आई है जब भारतीय एक्विजिशन फाइनेंसिंग मार्केट में काफी हलचल देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया बदलावों ने, जिनके तहत अब स्थानीय लेंडर्स एक्विजिशन कॉस्ट का 75% तक फंड कर सकते हैं, कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर टेकओवर को आसान बना दिया है। उम्मीद है कि इससे कॉरपोरेट ग्रोथ के लिए कैपिटल प्रदान करने में डोमेस्टिक और फॉरेन बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
हालांकि, निवेशकों को इस बड़े डेट-फंडेड खरीद के वित्तीय प्रभावों पर गौर करना चाहिए। जहां अधिग्रहण से कैपेसिटी और मार्केट शेयर बढ़ता है, वहीं बाहरी उधार पर भारी निर्भरता पैरेंट कंपनी, Grasim Industries पर डेट का दबाव बढ़ाती है। इस $1.5 अरब की फैसिलिटी को सर्विल करने की लागत भविष्य की तिमाही रिपोर्टों में एक महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल (Monitorable) होगी। इसके अतिरिक्त, इस डील की ऑपरेशनल सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कंपनी नए 5 गीगावाट पोर्टफोलियो को प्रभावी ढंग से इंटीग्रेट करने और रिन्यूएबल सेक्टर में बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और रेगुलेटरी कंप्लायंस से जुड़े जोखिमों को प्रबंधित करने में सक्षम है या नहीं।
निवेशकों के लिए अगले महत्वपूर्ण अपडेट्स में लोन सिंडिकेशन का फाइनल होना, एसेट ट्रांसफर का ऑफिशियल क्लोजर और इन नए प्रोजेक्ट्स से लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट मार्जिन में कैसे योगदान मिलेगा, इस पर मैनेजमेंट की कमेंट्री शामिल होगी।
