Aditya Birla Capital ने गोल्ड लोन बाज़ार में कदम रख दिया है। कंपनी की अगले 3 सालों में देशभर में 1,000 ब्रांच खोलने की योजना है। मार्च 2027 तक 200 से 300 ब्रांच चालू हो जाएंगी। इस कदम से कंपनी के सिक्योर्ड लेंडिंग पोर्टफोलियो को बढ़ावा मिलेगा, जो पिछली तिमाही में असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में **28%** की वृद्धि के साथ पहले ही मजबूत दिख रहा है।
गोल्ड लोन में उतरी Aditya Birla Capital
Aditya Birla Capital ने आधिकारिक तौर पर गोल्ड लोन बाज़ार में अपनी शुरुआत की है। कंपनी ने 20 अगस्त 2026 को इस नए वेंचर की घोषणा की, जिसके तहत अगले तीन वर्षों में पूरे भारत में 1,000 ब्रांच स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस खबर के बाद, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी के शेयर 2.46% चढ़कर ₹405.75 के स्तर पर पहुंच गए।
चरणबद्ध विस्तार की रणनीति
कंपनी इस नए व्यवसाय को चरणबद्ध तरीके से शुरू करेगी। उनका लक्ष्य मार्च 2027 तक 200 से 300 गोल्ड लोन ब्रांच खोलना है। इस रणनीति का मकसद सिक्योर्ड लेंडिंग सेगमेंट में कंपनी की पकड़ मजबूत करना है, जिसमें गोल्ड ज्वैलरी को गिरवी रखकर लोन दिया जाता है।
CEO का क्या कहना है?
कंपनी के नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल बिजनेस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CEO, राकेश सिंह ने कहा कि गोल्ड लोन सेगमेंट में प्रवेश करना कंपनी के लिए एक स्वाभाविक कदम है। उन्होंने जोर दिया कि इस विस्तार में पारदर्शिता और ग्राहकों की संपत्ति की सुरक्षित अभिरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कंपनी डिजिटल टूल्स के साथ फिजिकल ब्रांच सेवाओं को एकीकृत करने की योजना बना रही है ताकि लोन की मंजूरी और वितरण को तेज किया जा सके।
मजबूत वित्तीय आधार
यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब कंपनी के नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल डिवीजन ने शानदार वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, इस डिवीजन के असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 28% की वृद्धि हुई और यह ₹1,67,456 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में 32% का इजाफा हुआ और यह ₹1,222 करोड़ रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी के पास इस नए सेगमेंट में प्रवेश के लिए एक मजबूत वित्तीय नींव है।
निवेशकों के लिए जोखिम
हालांकि यह कदम कंपनी के लेंडिंग पोर्टफोलियो में विविधता लाएगा, गोल्ड लोन उद्योग में कुछ अंतर्निहित व्यावसायिक जोखिम भी हैं जिन पर निवेशकों को गौर करना चाहिए। इस व्यवसाय के लिए उच्च परिचालन विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, खासकर गिरवी रखे गए सोने की सुरक्षित हैंडलिंग और भंडारण के मामले में। इसके अलावा, कंपनी को वैल्यूएशन और लेंडिंग प्रथाओं के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी एक महत्वपूर्ण कारक है, जो उधारदाता द्वारा रखे गए कोलैटरल के मूल्य को प्रभावित करता है, हालांकि उद्योग की मानक प्रथाओं में इस जोखिम को कम करने के लिए एक मार्जिन बनाए रखना शामिल है। आने वाली तिमाहियों में, निवेशक कंपनी की ब्रांच नेटवर्क विस्तार योजना की सफलता और परिचालन तथा नियामक आवश्यकताओं का प्रबंधन करते हुए लाभ मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखेंगे।
