Aditya Birla Capital ने गोल्ड लोन बिजनेस में कदम रख दिया है। कंपनी अगले 3 साल में **1,000** ब्रांचें खोलने का टारगेट रखती है। इस खबर के बाद शेयर **3-4%** चढ़ गए। यह सेक्टर NBFCs के लिए गोल्ड लोन में **70%** की शानदार सालाना ग्रोथ के साथ बूम कर रहा है। हालांकि, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और प्रॉपर्टी-लोन सेगमेंट में जोखिमों पर भी नजर है।
आदित्य बिड़ला कैपिटल का गोल्ड लोन में बड़ा कदम
Aditya Birla Capital ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बिजनेस में उतरने की घोषणा की है। इस ऐलान के बाद 20 अगस्त 2026 को कंपनी के शेयर में करीब 3-4% की बढ़त देखी गई। निवेशक नए रेवेन्यू सोर्स की संभावनाओं को भांप रहे हैं, हालांकि प्रतिस्पर्धी बाजार का माहौल भी एक अहम फैक्टर है।
आक्रामक विस्तार की योजना
कंपनी अगले 3 सालों में करीब 1,000 गोल्ड लोन ब्रांचें खोलने की तैयारी में है। शुरुआती दौर में, मार्च 2027 तक 200 से 300 ब्रांचें चालू हो जाएंगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब NBFCs के कुल बकाया गोल्ड लोन जून 2026 तक सालाना आधार पर लगभग 70% बढ़कर करीब ₹3.41 लाख करोड़ हो गए हैं। Tata Capital और Godrej Capital जैसी बड़ी कंपनियां भी इस स्पेस में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं, जो सिक्योरड लेंडिंग पर इंडस्ट्री के फोकस को दर्शाता है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा और जोखिम
बाजार में नए खिलाड़ियों के आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जिससे लेंडर्स के लिए प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। गोल्ड के अगेंस्ट लोन देने वाले बिजनेस में सावधानी बरतना जरूरी है। अगर सोने की कीमतों में भारी गिरावट आती है, तो कोलैटरल (गिरवी रखी संपत्ति) का मूल्य कम हो सकता है। ऐसे में कंपनियों को अपने लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो को एडजस्ट करना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर प्रॉफिटेबिलिटी और लोन रिकवरी पर पड़ेगा।
प्रॉपर्टी लेंडिंग और रेगुलेटरी जांच
गोल्ड लोन के अलावा, NBFCs अपने पोर्टफोलियो के दूसरे हिस्सों, खासकर छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (SMEs) को दिए गए प्रॉपर्टी-बैकड लोन (LAP) को लेकर भी जांच के दायरे में हैं। इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि क्या ये बिजनेस पिछले कुछ सालों में देखे गए क्रेडिट ग्रोथ की तेज रफ्तार को संभालने की वित्तीय क्षमता रखते हैं। एनालिस्ट्स और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इन लेंडिंग प्रैक्टिसेज पर नजर रख रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तेज विस्तार कहीं बैड डेट्स (NPA) का पहाड़ न खड़ा कर दे।
निवेशकों के लिए, इस नए वेंचर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कितनी कुशलता से अपनी ब्रांचें खोलती है और गोल्ड प्राइस की वोलेटिलिटी जैसे अंतर्निहित जोखिमों को कैसे मैनेज करती है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी का लोन बुक बढ़ाना और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच हेल्दी प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना मुख्य आकर्षण रहेगा।
