Adani Ports and SEZ ने अगस्त महीने में कार्गो वॉल्यूम में **19.3%** की दमदार बढ़त दर्ज की है, जो जून तिमाही की सुस्ती के बाद एक बड़ी रिकवरी है। कंपनी ने **FY31** तक **1 अरब टन** कार्गो का लक्ष्य रखा है।
रिकवरी की रफ्तार
Adani Ports and Special Economic Zone (APSEZ) ने अगस्त में ऑपरेशनल मोमेंटम को वापस हासिल कर लिया है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण जून तिमाही में जो सप्लाई चेन चुनौतियां आई थीं, कंपनी उनसे तेजी से उबरती दिख रही है। यह ग्रोथ मुख्य रूप से ड्राय कार्गो की बढ़ती मांग और कंटेनर वॉल्यूम में तेजी की बदौलत है। कंपनी का लक्ष्य FY31 तक 1 अरब टन थ्रूपुट तक पहुंचने का है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के North Queensland Export Terminal जैसे इंटरनेशनल एसेट्स भी अपना योगदान दे रहे हैं।
लॉजिस्टिक्स में बड़ा दांव
कंपनी अब सिर्फ पोर्ट ऑपरेटर से बढ़कर एक पूर्ण ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी बनने की राह पर है। इस रणनीति के तहत:
- वेसल्स: बेड़े को 136 से बढ़ाकर 200 से ज्यादा किया जाएगा।
- रेल ऑपरेशंस: खुद के रेक (Rakes) की संख्या 132 से बढ़ाकर 200 की जाएगी।
- वेयरहाउसिंग: वेयरहाउसिंग क्षमता को 3.1 मिलियन स्क्वायर फीट से बढ़ाकर 12 मिलियन स्क्वायर फीट करने का लक्ष्य है।
फाइनेंशियल आउटलुक
कंपनी के फाइनेंशियल प्रदर्शन पर नजर डालें तो Q1 FY27 में ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹6,500 करोड़ रहा है, जो सालाना आधार पर 19% अधिक है। मैनेजमेंट ने FY27 के लिए ₹25,000 करोड़ से ₹26,000 करोड़ के ऑपरेटिंग प्रॉफिट का गाइडेंस दिया है। हालांकि ब्रोकरेज हाउसेस का रुख सकारात्मक है, लेकिन बाजार अब यह देख रहा है कि कंपनी अपने भारी-भरकम कैपेक्स (Capex) और लॉजिस्टिक निवेशों के बीच मुनाफे के मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती है।
