30 जुलाई को Adani Ports के शेयर में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। यह तब हुआ जब HSBC और Nomura जैसे ब्रोकरेज फर्मों ने इस पर पॉजिटिव आउटलुक बनाए रखा। हालांकि एनालिस्ट्स कंपनी के कार्गो वॉल्यूम ग्रोथ और मजबूत ऑपरेटिंग मार्जिन की बात कर रहे हैं, लेकिन हालिया नतीजों के बाद प्रॉफिट-टेकिंग देखने को मिल रही है।
ब्रोकरेज का भरोसा बरकरार
Adani Ports and Special Economic Zone Ltd (APSEZ) के शेयर में 30 जुलाई को शुरुआती कारोबार में 1.6% की गिरावट देखी गई। यह गिरावट जून तिमाही के नतीजों के बाद शुरू हुए डाउनट्रेंड का हिस्सा है। पिछले सत्र में शेयर 3.1% लुढ़क गया था, जिससे यह Nifty 50 इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में से एक बन गया।
बावजूद इसके, इस शॉर्ट-टर्म प्रेशर के बीच शेयर ने 2026 में अब तक 16.2% का रिटर्न दिया है, जो Nifty 50 के इसी अवधि में 7.3% की गिरावट की तुलना में कहीं बेहतर है।
लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी और ब्रोकरेज की राय
फाइनेंशियल एनालिस्ट्स कंपनी के लॉन्ग-टर्म बिजनेस पर भरोसा जता रहे हैं। HSBC ने 'Buy' रेटिंग के साथ शेयर का टारगेट प्राइस ₹2,200 रखा है। फर्म का मानना है कि कंपनी कार्गो वॉल्यूम ग्रोथ को बढ़ावा दे सकती है। जून तिमाही में डोमेस्टिक ऑपरेशंस ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन भविष्य के विस्तार के लिए इंटरनेशनल एक्विजिशन (विदेशों में कंपनियों को खरीदना) को मुख्य इंजन बताया गया है। हालांकि, ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि इन ग्रोथ इन्वेस्टमेंट्स के लॉन्ग-टर्म फायदों को समझने में निवेशकों को थोड़ा समय लग सकता है।
Nomura ने भी ₹2,080 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' की सलाह दी है। उनके एनालिसिस के अनुसार, कंपनी के पोर्ट्स बिजनेस ने तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया, जिसने लॉजिस्टिक्स डिवीजन के कमजोर प्रदर्शन की भरपाई की। Nomura का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 26 से 29 तक कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट (EBITDA) में 19% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिल सकता है। वैल्यूएशन के लिहाज़ से, शेयर अभी अनुमानित FY28 एंटरप्राइज वैल्यू-टू-EBITDA के करीब 13 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जिसे कंपनी की अनुमानित ग्रोथ के मुकाबले आकर्षक माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
हालिया शेयर की चाल यह दर्शाती है कि नतीजों के बाद अक्सर प्रॉफिट-टेकिंग होती है, भले ही एनालिस्ट्स का लॉन्ग-टर्म व्यू पॉजिटिव हो। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹3.97 लाख करोड़ है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इसकी मजबूत मौजूदगी को दिखाता है।
निवेशकों को कंपनी की एक्सपेंशन स्ट्रैटेजी पर खास नजर रखनी चाहिए, खासकर यह देखना होगा कि विदेशी एक्विजिशन से भविष्य में रेवेन्यू कैसे बढ़ता है। इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स सेगमेंट के प्रदर्शन में सुधार के संकेतों पर भी ध्यान देना होगा। इन ग्रोथ अवसरों का पीछा करते हुए कंपनी अपने बैलेंस शीट को कैसे मैनेज करती है, यह लॉन्ग-टर्म वैल्यूएशन के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
