Adani Group Stocks: म्यूचुअल फंड्स ने बढ़ाई हिस्सेदारी, शेयर रॉकेट हुए!

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Adani Group Stocks: म्यूचुअल फंड्स ने बढ़ाई हिस्सेदारी, शेयर रॉकेट हुए!

मंगलवार को Adani Group के स्टॉक्स में 6% तक की जोरदार तेजी देखी गई, जबकि बाकी बाजार सुस्त रहा। जून 2026 तिमाही के दौरान डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स ने Adani Enterprises जैसी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ा दी है। यह ट्रेंड ग्रुप के ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बिजनेस सेगमेंट में बढ़ती इंस्टीट्यूशनल दिलचस्पी को दिखाता है।

Adani Group में क्यों आई तेजी?

मंगलवार को Adani Group की कई कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल आया। Adani Green Energy और Adani Power के शेयर 6% चढ़कर अपने नए 52-सप्ताह के हाई पर पहुंच गए। Adani Energy Solutions भी 4% बढ़कर अपने 52-सप्ताह के शिखर पर पहुंच गया। यह तेजी ऐसे समय में आई जब भारतीय शेयर बाजार में बाकी कमजोरी बनी हुई थी।

जून तिमाही में इंस्टीट्यूशनल निवेश का खेल

यह शेयर की चाल जून 2026 तिमाही के डिस्क्लोजर डेटा के बाद आई है, जिससे पता चलता है कि इंस्टीट्यूशनल पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव हुआ है। डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स ने ग्रुप की मुख्य कंपनियों, खासकर फ्लैगशिप Adani Enterprises में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा दी है। Adani Enterprises में डोमेस्टिक फंड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 5.4% हो गई है, जो पिछली तिमाही के 2.71% के मुकाबले लगभग दोगुनी है। Adani Power और Adani Green Energy में भी थोड़ी-थोड़ी हिस्सेदारी बढ़ी है।

FPIs का रुख

फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भी ग्रुप में अपना एक्सपोजर एडजस्ट किया है। Adani Ports and Special Economic Zone में FPIs की हिस्सेदारी 13.25% से बढ़कर 15.58% हो गई। हालांकि, Adani Enterprises में FPIs की हिस्सेदारी इसी दौरान घटी है। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि इंस्टीट्यूशनल खरीदारी और बिकवाली फंड्स के मैंडेट और वैल्यूएशन के हिसाब से बदल सकती है।

बिजनेस ग्रोथ और भविष्य की रणनीति

Adani Enterprises ग्रुप के लिए नए वेंचर्स जैसे एयरपोर्ट्स, डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी पहलों का मुख्य जरिया बनी हुई है। कंपनी की यह क्षमता कि वह लंबे समय के लिए इंस्टीट्यूशनल कैपिटल को आकर्षित कर सके, उसके कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस मॉडल से जुड़ी है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स को बढ़ाने के लिए लगातार फंड की जरूरत होती है।

हालिया ब्रोकरेज फर्मों के फाइनेंशियल एनालिसिस में ग्रुप के ग्रीन एनर्जी क्षमता विस्तार और एयरपोर्ट एसेट्स को इस फाइनेंशियल ईयर में संभावित कमाई के अहम फैक्टर के तौर पर देखा गया है। ये विस्तार योजनाएं रेवेन्यू बढ़ाने के लिए हैं, लेकिन इनमें भारी कैपिटल स्पेंडिंग भी शामिल है। निवेशकों के लिए, इन प्रोजेक्ट्स की लगातार कैश फ्लो जेनरेट करने की क्षमता और जुड़े हुए डेट को मैनेज करना महत्वपूर्ण होगा। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में एग्जीक्यूशन टाइमलाइन और रेगुलेटरी अप्रूवल से जुड़े जोखिम हो सकते हैं, जो ग्रुप के डेट-टू-इक्विटी रेशियो और ओवरऑल प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकते हैं।

भविष्य में डेट में कमी, प्रोजेक्ट की कंप्लीशन टाइमलाइन और इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डिंग में बदलावों पर एक्सचेंज फाइलिंग पर नजर रखने से ग्रुप की फाइनेंशियल हेल्थ और स्टेबिलिटी की बेहतर तस्वीर मिलेगी।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.