Adani Group अपने सीमेंट कारोबार (Ambuja Cements और ACC) के अधिग्रहण से जुड़े कर्ज को कम करने के लिए **$2.5 बिलियन** की नई फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। इस रिफाइनेंसिंग प्लान और एयरपोर्ट बिजनेस में **₹9,825 करोड़** की हिस्सेदारी बिक्री के ऐलान से ग्रुप के शेयरों में जोश दिख रहा है।
कर्ज का बोझ कम करने की स्ट्रैटेजी
Adani Group अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। कंपनी का लक्ष्य Ambuja Cements और ACC के अधिग्रहण के दौरान लिए गए कर्ज को रीस्ट्रक्चर करना है। इसके लिए $2.5 बिलियन की रिफाइनेंसिंग का खाका तैयार किया गया है, जिसे अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इस फंडरेजिंग को दो भागों में बांटा गया है:
- ब्रिज लोन: $1.5 बिलियन का लोन, जिसकी अवधि 18 से 24 महीने होगी। इसे बाद में भारतीय बैंकों (जैसे State Bank of India और HDFC Bank) के जरिए रुपये में तब्दील करने की योजना है।
- लॉन्ग-टर्म फैसिलिटी: $1 बिलियन का 5 साल की मैच्योरिटी वाला लोन, जो RBI के एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) फ्रेमवर्क के तहत लिया जाएगा।
एयरपोर्ट बिजनेस में हिस्सेदारी बिक्री
रिफाइनेंसिंग की खबर के साथ ही Adani Enterprises ने Adani Airport Holdings में 5.54% हिस्सेदारी बेचकर ₹9,825 करोड़ जुटाने का एलान किया है। इस डील में BlackRock, Temasek और Premji Invest जैसे ग्लोबल दिग्गज निवेशक शामिल हैं। इन दोनों बड़ी खबरों का असर मार्केट में साफ दिख रहा है और 9 सितंबर, 2026 को ग्रुप के शेयरों में सकारात्मक रुझान देखा गया है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
यह कदम कंपनी की डेट मैनेजमेंट पॉलिसी में बड़ा बदलाव है। शॉर्ट-टर्म ऑफशोर कर्ज पर निर्भरता घटाकर लंबी अवधि के स्ट्रक्चर पर ध्यान देने से भविष्य में रिस्क कम होगा। हालांकि, ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स की अस्थिरता और करेंसी हेजिंग की लागत इस पूरी डील की फाइनल कॉस्ट तय करेगी। फिलहाल, DBS Group और Standard Chartered जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ बातचीत जारी है, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहनी चाहिए।
