Adani Group ने लॉजिस्टिक्स और पावर में बढ़ाई पहुँच
Adani Group अपने लॉजिस्टिक्स और पावर बिजनेस को मजबूत करने के लिए Jaiprakash Associates (JAL) के मुख्य एसेट्स का अधिग्रहण कर रहा है।
Adani Ports and Special Economic Zone (SEZ) ₹1,500 करोड़ में Jaypee Fertilizers & Industries (JFIL) को खरीदेगी। इसमें लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग के लिए कानपुर में लगभग 243 एकड़ जमीन शामिल है, जिससे Adani Ports के मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) नेटवर्क का विस्तार होगा।
Adani Power की उत्पादन क्षमता में इजाफा
Adani Power ₹2,993.59 करोड़ में Jaiprakash Power Ventures (JPVL) की 24% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। साथ ही, यह ₹1,200 करोड़ में JAL के चुर्क स्थित 180 MW के थर्मल पावर प्लांट और उससे जुड़े एसेट्स के साथ Prayagraj Power Generation Company Limited की 11.49% हिस्सेदारी भी अपने नाम करेगी।
ये सभी सौदे JAL के लिए NCLT-अप्रूव्ड रेजोल्यूशन प्लान का हिस्सा हैं। Competition Commission of India (CCI) ने अगस्त 2025 में इस प्लान को मंजूरी दी थी। National Company Law Tribunal (NCLT) ने 17 मार्च, 2026 को इसे मंजूरी दी, जिसके बाद National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने 04 मई, 2026 को इस फैसले को बरकरार रखा। उम्मीद है कि यह ट्रांजेक्शन NCLT की मंजूरी के 90 दिनों के भीतर पूरा हो जाएगा।
रणनीतिक विकास और मार्केट पोजिशन
Adani Power, जो भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट थर्मल पावर प्रोड्यूसर है, FY32 तक ₹2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर के साथ अपनी जनरेशन कैपेसिटी को 41.87 GW तक ले जाने की योजना बना रही है। Adani Power का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹4.25 लाख करोड़ है। Jaiprakash Power Ventures का वैल्यूएशन करीब ₹12,900 करोड़ है। वहीं, ₹4.08 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाली Adani Ports का लक्ष्य 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर बनना है। ई-कॉमर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से प्रेरित भारतीय लॉजिस्टिक्स मार्केट में भी काफी वृद्धि की उम्मीद है।
रेगुलेटरी मंजूरी और वित्तीय परिदृश्य
इस अधिग्रहण को CCI, NCLT और NCLAT से मंजूरी मिल चुकी है। भारत का पावर सेक्टर लगातार बदलती नीतियों का सामना कर रहा है। Adani Group का लक्ष्य 2030 तक अपने कर्ज को ₹1 लाख करोड़ पर सीमित करना है, और इसके मार्केट कैपिटलाइजेशन में रिकवरी देखी गई है। हालांकि, भारत की पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की वित्तीय सेहत को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
