डिजिटल इंश्योरेंस कंपनी Acko ने अपने फ्रेंचाइजी गैराज नेटवर्क का विस्तार शुरू कर दिया है। इस कदम का लक्ष्य रिपेयर और क्लेम की लागत को **30%** तक कम करना है। IPO से पहले कंपनी के इस प्रॉफिटेबिलिटी प्लान पर निवेशकों की नजर है।
क्लेम लागत पर लगाम की रणनीति
Acko General Insurance अब डिजिटल के साथ-साथ फिजिकल रिपेयर स्पेस में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। कंपनी ने बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, दिल्ली-एनसीआर और अहमदाबाद जैसे शहरों में 10 से अधिक ऑपरेशनल सेंटर स्थापित किए हैं। इस नए मॉडल का उद्देश्य रिपेयर और क्लेम खर्च में 20% से 30% की भारी कमी लाना है।
क्यों जरूरी है यह कदम?
भारतीय मोटर इंश्योरेंस इंडस्ट्री में अक्सर डीलरशिप का दबदबा रहता है, जो इंश्योरेंस बेचते भी हैं और रिपेयर भी करते हैं। इससे रिपेयर बिलों में हेरफेर की संभावना बनी रहती है। अपना खुद का गैराज नेटवर्क खड़ा करके, Acko अब रिपेयरिंग प्रोसेस पर सीधा ऑडिट कर सकेगी और फालतू बिलिंग को रोक पाएगी।
फ्रेंचाइजी मॉडल का गणित
Acko ने इस विस्तार के लिए 'फ्रेंचाइजी मॉडल' चुना है, ताकि भारी कैपिटल खर्च से बचा जा सके। इसमें पार्टनर इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराते हैं, जबकि Acko अपनी टेक्नोलॉजी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) देती है।
IPO और आगे की राह
मार्केट एक्सपर्ट्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि Acko भविष्य में IPO लाने की दिशा में काम कर रही है। जनरल इंश्योरेंस सेक्टर में 'लॉस रेशियो' (Loss Ratio) को कंट्रोल करना ही अंडरराइटिंग प्रॉफिट का असली आधार है। हालांकि, पूरी तरह डिजिटल से फिजिकल नेटवर्क में शिफ्ट होना एक चुनौतीपूर्ण काम है, जिसमें सर्विस क्वालिटी को मेंटेन रखना कंपनी के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
