आबू धाबी की International Holding Company और First Abu Dhabi Bank अब Bandhan Financial Services (BFSL) में **25% से 32%** तक हिस्सेदारी खरीदने की शुरुआती चर्चा कर रहे हैं। यह डील प्रमोटर को RBI के **2030** तक के शेयरहोल्डिंग नियमों को पूरा करने में मदद करेगी और मौजूदा निवेशकों को बाहर निकलने का मौका देगी।
प्रमोटर की रणनीति और RBI का दबाव
इस बातचीत का मुख्य आधार RBI की गाइडलाइंस हैं, जिसके तहत प्रमोटर को 2030 तक अपनी हिस्सेदारी घटाकर 26% तक लानी है। इस डील के जरिए GIC और International Finance Corporation जैसे लंबे समय के निवेशकों को एग्जिट मिलने की उम्मीद है।
बैंक के सामने चुनौतियां
बैंक फिलहाल अपने फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को दुरुस्त करने में जुटा है। जुलाई 2026 में बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अपने रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) के अनुमान को घटाकर 1.2% से 1.4% कर दिया है, जो पहले 1.6% से 1.8% के बीच था। इसका बड़ा कारण टेक्नोलॉजी में बढ़ता खर्च और डिपॉजिट्स की बढ़ती लागत (Cost of Deposits) है।
माइक्रोफाइनेंस का रिस्क
बैंक का शेयर परफॉर्मेंस साल 2026 में काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो पर मॉनसून और सप्लाई चेन जैसी बाहरी परिस्थितियों का असर सीधे तौर पर पड़ता है, जिससे एसेट क्वालिटी को लेकर निवेशकों की चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि, खाड़ी देशों के सॉवरेन फंड्स की रुचि भारतीय बैंकिंग सेक्टर में बढ़ते भरोसे का संकेत है, लेकिन निवेशकों की नजरें अब डील के वैल्यूएशन और सरकारी मंजूरी की टाइमलाइन पर टिकी हैं।
