FY26 की चौथी तिमाही (31 मार्च 2026 को समाप्त) के नतीजे AU Small Finance Bank के लिए बेहद शानदार रहे। बैंक ने सालाना आधार पर अपने नेट प्रॉफिट में 65.2% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की, जो बढ़कर ₹832 करोड़ हो गया। इस दौरान बैंक का नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 23% बढ़कर ₹2,582 करोड़ पर पहुँच गया।
एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला, जहाँ ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) पिछले तिमाही के 2.30% से गिरकर 2.03% पर आ गए, और नेट NPA 0.88% से घटकर 0.74% रह गए। बैंक ने प्रोविजन्स को भी सालाना आधार पर घटाकर ₹269 करोड़ कर दिया।
इन मजबूत फाइनेंशियल नतीजों के बावजूद, AU Small Finance Bank का स्टॉक सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को 2.13% गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 0.81% चढ़ रहा था। बैंक ने ₹1 प्रति शेयर का डिविडेंड भी घोषित किया।
नए CFO गौरव जैन के नेतृत्व में यह परफॉरमेंस निवेशकों के लिए भविष्य की ग्रोथ और वैल्युएशन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शेयर बाजार में AU Small Finance Bank का मार्केट कैप लगभग ₹78,000-₹79,700 करोड़ है और इसका P/E रेश्यो 33.8 से 34.49 के बीच है।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर पर नजर डालें तो 2026 की शुरुआत में क्रेडिट ग्रोथ 11-13% रहने की उम्मीद है, जो इकोनॉमिक रिकवरी और रिटेल व SME सेगमेंट की मजबूत डिमांड से प्रेरित है। हालाँकि, एनालिस्ट्स लिक्विडिटी प्रेशर और डिपॉजिट गैप बढ़ने की चिंताओं पर भी गौर कर रहे हैं, जिससे NIMs पर दबाव पड़ सकता है। हाल के दिनों में पब्लिक सेक्टर बैंक्स (PSUs) ने प्राइवेट बैंक्स को पीछे छोड़ा है, जो बाजार की बदलती पसंद को दर्शाता है।
निवेशकों की चिंताएं शेयर की गिरावट की मुख्य वजह हैं। प्रॉफिट ग्रोथ की स्थिरता, डिपॉजिट के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा और टाइट लिक्विडिटी से मार्जिन पर संभावित दबाव, और प्रोविजनिंग में कटौती जैसी बातों पर उनका ध्यान केंद्रित है। हालांकि प्रोविजनिंग में कमी से बॉटम लाइन बढ़ी है, लेकिन इसे क्रेडिट क्वालिटी में वास्तविक सुधार के बजाय एक रणनीतिक कदम के तौर पर भी देखा जा सकता है।
गौरतलब है कि 2026 की शुरुआत में स्टॉक में काफी वोलेटिलिटी देखी गई थी, जिसमें वैल्यूएशन संबंधी चिंताओं के कारण यह अपने 52-हफ्ते के हाई से 40% तक गिर गया था। इससे पता चलता है कि बाजार की भावनाएं और री-रेटिंग का दबाव, चाहे शॉर्ट-टर्म अर्निंग बीट्स क्यों न हों, शेयर पर हावी रह सकते हैं।
