AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों में नरमी के बाद, बैंक अब यूनिवर्सल बैंक बनने के और करीब पहुँच गया है। इस बीच, बैंक ने जून तिमाही में **37%** का शानदार मुनाफा दर्ज किया है, जो कि रिटेल पर फोकस वाली रणनीति का नतीजा है।
यूनिवर्सल बैंक बनने की ओर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक अपनी कॉर्पोरेट संरचना को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने यूनिवर्सल बैंक बनने की राह को आसान बना दिया है। इस बदलाव के बाद, बैंक इस फाइनेंशियल ईयर में अपनी फुल-सर्विस बैंकिंग ऑपरेशंस की ओर बढ़ेगा। यह बड़ी खबर ऐसे समय आई है जब बैंक ने जून 2026 को समाप्त तिमाही में 37% का सालाना प्रॉफिट ग्रोथ दर्ज किया है, जो कि ₹796 करोड़ रहा।
RBI के फैसले से मिली रफ्तार
यूनिवर्सल बैंक स्टेटस की ओर बढ़ना तब और आसान हो गया जब RBI ने मार्च 2026 में नॉन-ऑपरेटिव फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी (NOFHC) की आवश्यकता को बदल दिया। इससे बैंक की कॉर्पोरेट संरचना का रास्ता साफ हो गया। RBI ने अगस्त 2025 में ही 'इन-प्रिंसिपल' अप्रूवल दे दिया था। यह बदलाव बैंक को अधिक लचीलेपन के साथ काम करने की अनुमति देगा। इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, बैंक ने हाल ही में योगेश जैन को डेप्यूटी सीईओ (Deputy CEO) बनाकर अपनी लीडरशिप टीम को मजबूत किया है।
रिटेल पर फोकस और ग्रोथ टारगेट्स
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक अपनी रिटेल और कमर्शियल बैंकिंग पर फोकस बनाए रखेगा। मैनेजमेंट की योजना बड़े कॉर्पोरेट लेंडिंग में तुरंत उतरने की नहीं है। बैंक का लक्ष्य 1.8% का सस्टेनेबल रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) और 15-16% का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) हासिल करना है। जून की तिमाही में, बैंक ने 1.7% का एनुअलाइज्ड ROA और 15.6% का ROE दर्ज किया है।
इस ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए, बैंक 100 नई लायबिलिटी-फोकस्ड ब्रांच खोलने की योजना बना रहा है। साथ ही, AD-I लाइसेंस के साथ ट्रेड और फॉरेक्स सॉल्यूशंस में निवेश किया है, जिससे ग्राहकों को ज्यादा सेवाएं मिल सकें। Fincare के अधिग्रहण (acquisition) से बैंक की गोल्ड लोन फ्रेंचाइजी को भी फायदा हुआ है, जिससे भविष्य में और बड़े अधिग्रहण की जरूरत कम हो गई है।
जोखिम और आगे की राह
हालांकि, बैंक की रिटेल-आधारित ग्रोथ स्ट्रेटेजी अच्छा कर रही है, लेकिन मैनेजमेंट टेक्सटाइल और जेम्स और ज्वेलरी जैसे सेगमेंट्स में सावधानी बरत रहा है। एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर खास नजर रखी जा रही है, खासकर माइक्रोफाइनेंस (MFI) और पर्सनल लोन पोर्टफोलियो में। निवेशकों की निगाहें मार्जिन पर पड़ने वाले संभावित दबाव पर भी है, क्योंकि बैंक अपनी ब्रांच का विस्तार कर रहा है। इसके अलावा, मैक्रोइकॉनोमिक अस्थिरता और टाइट लिक्विडिटी कंडीशंस भी बैंकिंग सेक्टर के लिए चुनौतियाँ पैदा कर सकती हैं।
बैंक के लिए अगले बड़े कदम यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए फाइनल अप्रूवल लेना और ब्रांच विस्तार योजना को लागू करना है। आने वाली तिमाहियों में, निवेशकों की नजर बैंक की मार्जिन और एसेट क्वालिटी पर रहेगी।
