सरकारी खातों पर गिरी गाज: AU SFB की बढ़ी मुश्किलें
हरियाणा के वित्त विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर AU Small Finance Bank सहित कुछ बैंकों के सरकारी खातों को तुरंत प्रभाव से डी-एम्पनल (de-empanel) करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि अब इन बैंकों में राज्य का पैसा जमा नहीं होगा और न ही इससे कोई लेन-देन हो सकेगा। यह कड़ा कदम IDFC First Bank में हरियाणा सरकार के ₹590 करोड़ के कथित धोखाधड़ी के खुलासे के बाद उठाया गया है। इस खबर के फैलते ही AU Small Finance Bank का शेयर 7.4% तक गिरकर ₹952.15 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया, जबकि बाजार के मुख्य सूचकांक BSE Sensex करीब 0.61% की बढ़त दिखा रहा था।
AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का जवाब: 'कोई वित्तीय प्रभाव नहीं'
AU Small Finance Bank ने इस डी-एम्पनल ऑर्डर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बैंक की प्रारंभिक आंतरिक जांच में किसी भी तरह के वित्तीय नुकसान या धोखाधड़ी का कोई संकेत नहीं मिला है। बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि संबंधित सरकारी विभाग ने स्वयं ₹72 करोड़ की राशि दो प्राइवेट बैंकों से AU SFB के एक विशेष खाते में ट्रांसफर करवाई थी। इसमें से ₹47 करोड़ का लेन-देन (कुल 14 ट्रांजैक्शन के माध्यम से) सीधे उसी सरकारी विभाग द्वारा अधिकृत (authorized) था। इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बैंक ने कुछ कर्मचारियों को फिलहाल ड्यूटी से हटा दिया है और वह हरियाणा सरकार के साथ लगातार संपर्क में है।
डिपॉजिट में आई कमी, पर अनुपात नगण्य
इस घटनाक्रम के बावजूद, AU Small Finance Bank में हरियाणा सरकार के कुल डिपॉजिट में निश्चित रूप से कमी आई है। 17 फरवरी को जहां यह राशि ₹735 करोड़ थी, वहीं 21 फरवरी तक यह घटकर ₹538 करोड़ रह गई। यह राशि करीब 200 खातों में फैली हुई थी। हालांकि, यह बैंक की कुल डिपॉजिट बेस का महज 0.4% है, जबकि बैंक का मार्केट कैप लगभग ₹76,900 करोड़ है। इसके बावजूद, बाजार की ओर से प्रतिक्रिया काफी गंभीर रही है।
वैल्यूएशन और सेक्टर की चिंताएं
AU Small Finance Bank फिलहाल 33.27 के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। यह Ujjivan Small Finance Bank (P/E ~24.55) से ज्यादा है, लेकिन IDFC First Bank (P/E ~41.8-46.3) से कम है। शेयर में आई तेज गिरावट दर्शाती है कि निवेशक स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) सेक्टर के लिए रेगुलेटरी जोखिमों (regulatory risks) और संभावित संक्रमण (contagion) को लेकर काफी चिंतित हैं।
सेक्टर पर दबाव और AU SFB की स्थिति
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) पर रेगुलेटरी जांच का दबाव बढ़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इन बैंकों में एकाग्रता जोखिम (concentration risks) और एसेट क्वालिटी (asset quality) को लेकर चिंता जता चुकी है। कुल मिलाकर SFBs का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPAs) फाइनेंशियल ईयर 25 में 4.35% तक पहुंच गया था। हालांकि, AU Small Finance Bank का GNPA दिसंबर 2024 तक 2.3% और Q1FY26 में 2.47% था, जो सेक्टर के औसत से बेहतर प्रदर्शन दिखाता है।
बेयर केस: विश्वास की कमी और व्यापक जोखिम
भले ही AU Small Finance Bank अपनी तरफ से सरकारी लेन-देन के सही होने का दावा कर रहा है, लेकिन हरियाणा सरकार का यह डी-एम्पनल करने का फैसला बैंक के प्रति विश्वास में कमी का स्पष्ट संकेत देता है। सबसे बड़ा जोखिम यह है कि अगर अन्य राज्य सरकारें या नियामक संस्थाएं इस घटना को SFB सेक्टर की कमजोरी के रूप में देखती हैं, तो AU SFB को और भी डी-एम्पनल या कंप्लायंस (compliance) से जुड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। बैंक का प्रीमियम P/E रेश्यो संभावित रेगुलेटरी जांच की आंच को पूरी तरह से अभी डिस्काउंट नहीं करता। इसके अतिरिक्त, Q1FY26 में AU SFB के GNPA में 2.47% तक की मामूली बढ़ोतरी भी एसेट क्वालिटी मैनेजमेंट पर कुछ सवाल खड़े करती है।
एनालिस्ट की राय और भविष्य की राह
शेयर में आई इस भारी गिरावट के बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट AU Small Finance Bank पर 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं और भविष्य में अच्छी तेजी की उम्मीद जता रहे हैं। हालांकि, कुछ एनालिस्ट एसेट क्वालिटी बिगड़ने की आशंकाओं के चलते 'Reduce' रेटिंग भी दे रहे हैं, जिससे बाजार में मिली-जुली राय दिख रही है। बैंक का यूनिवर्सल बैंक बनने की ओर बढ़ना एक बड़ा डेवलपमेंट है, लेकिन यह हालिया घटना ऐसे विस्तार की महत्वाकांक्षाओं के साथ आने वाली कड़ी निगरानी (oversight) की याद दिलाती है।