Asset Reconstruction Companies (ARCs) ने सरकार से Debt Recovery Tribunals (DRT) और SARFAESI Act में बड़े सुधारों की मांग की है। इंडस्ट्री चाहती है कि अंतरिम स्टे (Interim Stays) की समय सीमा तय हो ताकि कानूनी अड़चनों को दूर किया जा सके।
कानूनी अड़चनों को दूर करने का प्रस्ताव
इंडस्ट्री बॉडी का मानना है कि 'Interim Stays' के कारण मामले सालों-साल लटके रहते हैं। प्रस्ताव के अनुसार, ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए स्टे की वैधता 2 महीने होनी चाहिए, उसके बाद वह अपने आप खत्म हो जाए, जब तक कि उसे विशेष रूप से बढ़ाया न जाए। इसके अलावा, अपील करने से पहले 'Pre-deposit' की शर्त अनिवार्य करने की मांग की गई है ताकि फिजूल की मुकदमेबाजी कम हो सके और गिरवी रखी संपत्ति की नीलामी में तेजी आए।
एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार और डिजिटल मोड
ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए खाली पड़े पदों को 15 दिनों के भीतर भरने की मांग की गई है। साथ ही, नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विसेज लिमिटेड (NeSL) के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को कर्ज और डिफॉल्ट के मुख्य साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है।
रिकवरी का दमदार डेटा
वित्त वर्ष 2021 से 2025 के दौरान DRT और SARFAESI के जरिए कुल ₹2.30 लाख करोड़ की रिकवरी हुई है, जो इसी अवधि में IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) के ₹2.28 लाख करोड़ से अधिक है। यह साबित करता है कि बैंकिंग सेक्टर के लिए यह चैनल कितना जरूरी है। वहीं, अगस्त 2026 में लागू हुआ 'Tribunals Reforms Act, 2026' इस सेक्टर की निगरानी को और मजबूत बनाने का काम कर रहा है।
चुनौतियाँ और कैपिटल नियम
सुधारों की मांग के बीच, एसेट वैल्युएशन गैप और कुछ चुनिंदा प्राइवेट ARCs में मिलीभगत का खतरा भी बना हुआ है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 31 मार्च 2026 तक सभी ARCs के लिए न्यूनतम नेट ओनड फंड (NOF) ₹300 करोड़ अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे छोटी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
