Asset Reconstruction Company (India) Ltd (ARCIL) ने दूसरी तिमाही के दमदार नतीजे पेश किए हैं। रिकवरी में तेजी और बेहतर लागत प्रबंधन के चलते कंपनी का नेट प्रॉफिट **23%** बढ़कर **₹147 करोड़** रहा, जबकि एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹20,274 करोड़** तक पहुंच गया है।
मुनाफे का गणित
कंपनी ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले साल इसी अवधि में मुनाफा ₹120 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹147 करोड़ हो गया है। इस ग्रोथ के पीछे मुख्य वजह फीस और इन्वेस्टमेंट इनकम में 64% का भारी उछाल है। साथ ही, कंपनी ने अपने खर्चों को 31% घटाकर महज ₹42 करोड़ पर सीमित कर दिया, जिसका सीधा असर बॉटम लाइन पर दिखा है।
रिकवरी में रफ़्तार
ARCIL का मुख्य काम बैंकों के बैड लोन से वसूली करना है। इस मोर्चे पर कंपनी ने लगातार दूसरी तिमाही में ₹1,000 करोड़ के आंकड़े को पार किया है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कुल रिकवरी ₹1,069 करोड़ रही। वहीं, पहली छमाही में कंपनी ने कुल ₹2,135.1 करोड़ की रिकवरी दर्ज की है, जो पिछले साल के मुकाबले 21% ज्यादा है।
बिजनेस एक्सपेंशन और रिडेम्पशन
कंपनी अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए लगातार स्ट्रेस्ड एसेट्स खरीद रही है। पहली छमाही में कंपनी ने ₹1,707 करोड़ के एसेट्स खरीदे, जो सालाना आधार पर 18% की बढ़ोतरी है। इसमें ₹717.8 करोड़ का निवेश कंपनी ने अपने फंड से किया है। निवेशकों के लिए 'सिक्योरिटी रिसिप्ट रिडेम्पशन रेशियो' (Security Receipt Redemption Ratio) का आंकड़ा बेहद अहम है, जहां ARCIL ने 52% का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है, जो बैड लोन को सुलझाने की कंपनी की क्षमता को दर्शाता है।
सेक्टर का आउटलुक
ARC का बिजनेस पूरी तरह से बैंकों द्वारा बैड लोन बेचने पर निर्भर करता है। साथ ही, Reserve Bank of India (RBI) के बदलते नियमों का असर भी इस सेक्टर पर रहता है। ऐसे में कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ इस बात पर टिकी है कि वे कितनी तेजी से एसेट्स एक्वायर करते हैं और रिकवरी रेट को कितना बनाए रख पाते हैं।
