Asian Infrastructure Investment Bank (AIIB) ने भारत में वाटर सेक्टर के लिए अपनी फंडिंग रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। बैंक अब सरकारी फंडिंग के बजाय प्राइवेट सेक्टर मॉडल पर फोकस कर रहा है, जिससे स्मार्ट मीटरिंग और सोलर इरिगेशन जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी।
एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) भारत में जल प्रबंधन की चुनौतियों को हल करने के लिए अपनी कैपिटल स्ट्रैटेजी को पूरी तरह से बदल रहा है। मॉनसून में 15% की कमी और जल संकट को देखते हुए, बीजिंग स्थित यह बैंक अब पारंपरिक इंफ्रास्ट्रक्चर से हटकर वाटर सेक्टर पर फोकस बढ़ा रहा है। बैंक ने अब तक भारत में कुल $13.8 बिलियन का निवेश किया है, लेकिन इसमें वाटर प्रोजेक्ट्स की हिस्सेदारी 7% से भी कम है। नई रणनीति के तहत, बैंक अब प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देगा।
प्राइवेट कैपिटल की ओर बदलाव
भारत में अब तक वाटर सेक्टर में 85% निवेश सरकारी खजाने से होता आया है, जिससे प्राइवेट प्लेयर्स के लिए मुनाफे की संभावना कम रहती थी। AIIB अब अर्बन वाटर यूटिलिटीज को टारगेट कर रहा है ताकि स्मार्ट मीटरिंग और व्यवस्थित बिलिंग के जरिए प्रोजेक्ट्स को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इससे संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की दिलचस्पी बढ़ेगी।
वाटर टेक और एग्रीकल्चर पर नजर
देश के कुल फ्रेश वॉटर का लगभग 80% हिस्सा कृषि में उपयोग होता है। बैंक इस क्षेत्र में सोलर-पावर्ड इरिगेशन पंप और ऑटोमेटेड शट-ऑफ तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। उदाहरण के तौर पर, महाराष्ट्र में $1.1 बिलियन का एक प्रोग्राम पहले से ही भूजल प्रबंधन के लिए काम कर रहा है। इसके अलावा, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग पर भी जोर दिया जा रहा है, जो आने वाले समय में एक बड़ा बिजनेस बन सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
बाजार के नजरिए से देखें तो वाटर ट्रीटमेंट, पाइपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट मीटर और हाई-एफिशिएंसी एग्रीकल्चरल पंप बनाने वाली कंपनियां इस थीम का मुख्य हिस्सा होंगी। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में 'एग्जीक्यूशन' (Execution) और नीतिगत बदलाव एक बड़ी चुनौती हो सकते हैं। आने वाले समय में सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले टेंडर्स और प्रोजेक्ट्स की गति ही इस निवेश का असल पैमाना होगी।
